चीन अमरीका रिश्तों का महत्वपूर्ण पड़ाव

ओबामा और हू जिन्ताओ
Image caption चीन और अमरीका रिश्तों को सकारात्मक नई दिशा देने के इच्छुक हैं

चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ और अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस में एक निजी भोज किया.

चीन के राष्ट्रपति चार दिन की अमरीका यात्रा पर है. इसे विश्लेषक पिछले 30 वर्षों की सबसे अहम यात्रा बता रहे हैं क्योंकि चीन की आर्थिक, सैन्य और राजनयिक ताक़त बहुत बढ़ी है.

भोज में अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टॉम डॉनिलॉन ने भी भाग लिया.

इससे पहले हू जिंताओ का सैन्य सम्मान के साथ भव्य स्वागत किया गया.

पर दोनो देशों के रिश्तों में तनाव के भी कई कारण रहे हैं जैसे चीन की मुद्रा पर नियंत्रण और ताइवान में मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतें.

माना जा रहा है कि इस यात्रा में इनके अलावा उत्तर कोरिया की परमाणु गतिविधियों पर भी चर्चा हो सकती है.

वहीं चीन की तिब्बत नीति के खिलाफ़ व्हाइट हाउस के बाहर कुछ लोगों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया और नारे लगाए.

महत्वपूर्ण यात्रा

चीन के विदेश मंत्रालय ने इसे महत्वपूर्ण यात्रा बताया है.

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने आशा व्यक्त की, “ये यात्रा चीन अमरीका संबंधों को सकारात्मक दिशा देगी, द्विपक्षीय रिश्ते को नए युग में पहुंचाएगी और सहयोग को नए स्तर तक ले जाएगी.’’

हू की शायद राष्ट्रपति के रुप में ये अंतिम अमरीका यात्रा हो क्योंकि चीन में सत्ता हस्तांतरण का काम 2013 तक हो जाएगा.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा, ''अमरीका और चीन के रिश्ते एक नाज़ुक मोड़ पर है, एक ऐसा समय जब हमें छोटे बड़े निर्णय लेने हैं जो कि इस रिश्ते की आगे की दिशा तय करेंगे.''

दोनों देश पिछले साल रिश्तों में उभरे भारी मतभेदों से वाकिफ़ है- युआन का अवमूल्यन, व्यापार में भारी अंतर और अमरीका के ताइवान को हथियार बेचने का मामला.

अमरीका को चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता भी चिंतित कर रही है.

इस माह के शुरु में चीन गए अमरीकी प्रतिरक्षा मंत्री रोबर्ट गेट्स को बीजिंग ने बताया था कि उसने जे 20 लड़ाकू विमान का सफल परिक्षण किया है जिसे रडार भी नहीं देख सकता है.

साथ ही अमरीका ने अपने पूर्व एशियाई सहयोगियों, खासकर दक्षिण कोरिया और जापान का ज्यादा जोरशोर से समर्थन करना शुरू किया है.

दोनों देशों के बीच उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और आक्रामक रवैये को लेकर भी तनातनी रही है.

हू ने विदेशी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में माना कि दोनो देशों में कुछ संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद है, पर दोनों देशों के लिए टकराव से ज़्यादा सहयोग का रास्ता बेहतर होगा.

हू जिंताओ की यात्रा के ठीक पहले चीन के व्यापार मिशन ने अमरीकी कंपनियों से ह्यूस्टन में 60 करोड़ डॉलर की व्यापारिक सौदे किए ताकि बातचीत का माहौल सकारात्मक बन सके.

चीन और अमरीका के बीच 400 अरब डॉलर का व्यापार है.

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