भारतीय को जासूसी के लिए 32 साल की सज़ा

नौशिर गोवाडिया
Image caption नौशिर गोवाडिया पर चीन को सैन्य तकनीक बेचने के लिए सज़ा सुनाई गई है

भारतीय मूल के अमरीकी नागरिक नौशीर गोवाडिया को 32 साल की सज़ा सुनाई गई है. अमरीका की एक अदालत में इस बी-2 लडाकू विमान के इस इंजीनियर को अमरीका की गुप्त सैन्य जानकारी चीन को बेचने का आरोप लगा है.

गोवाडिया 66 साल के हैं और पिछले पाँच वर्षों से जेल में है.

अमरीका के असिस्टेंट एटोर्नी केन सोरेनसन ने कहा, “मुझे इस बात से निराशा हुई है कि उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा नहीं सुनाई गई. अगर ऐसा होता तो ये सही संदेश जाता. पर कई मायनों में 32 साल भी काफी कड़ी सज़ा है.”

मुंबई में पैदा हुए गोवाडिया की सज़ा चीन के जे 20 स्टेल्थ फाइटर की परीक्षण उड़ान के कुछ सप्ताह बाद आई है.

आरोप

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उसने चीन को एक एक्सजॉस्ट नौज़ल बनाने में मदद की जो कम गर्मी छोड़ता है, जिसकी वजह से इस मिसाइल को इंफ्रारेड डिटेक्टर भी देख नहीं पाते.

आरोप है कि इस तकनीक के बदले उन्हें दो वर्षो से कुछ ज़्यादा समय में एक लाख 10 हज़ार अमरीकी डॉलर दिए गए.

अगस्त में एक अमरीकी अदालत ने गोवाडिया को 14 मामलों में दोषी पाया था. इनमें साजिश, किसी दूसरे देश को मदद करने के लिए राष्ट्रीय प्रतिरक्षा जानकारी सौंपना और शस्त्र और निर्यात नियंत्रण के उल्लंघन के आरोप शामिल थे.

गोवाडिया के पुत्र, एश्टन का कहना है कि उनके पिता निर्दोष हैं और वो इस सज़ा के ख़िलाफ़ अपील करेंगे.

अदालत के दस्तावेज़ों में कहा गया है कि उन्होंने अपनी इस कमाई को स्विस बैंक खातों में छुपाया था.

गोवाडिया 1968 से 1986 तक नोर्थोर्प में काम करते थे जहाँ उन्होंने बी 2 बॉम्बर के प्रपल्शन तकनीक को विकसित करने में मदद की थी.

उनपर आरोप है कि 2003 और 2005 के बीच गोवाडिया ने चीन की छह गुप्त यात्राएं की थी और चीन को अपनी मिसाइल विकसित करने की मदद की थी.

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