हिंदी सेवा के शॉर्टवेव पर प्रसारण बंद होंगे

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Image caption बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में भारी कटौती की जाएगी

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के मुताबिक इसकी सभी सेवाओं में से 650 नौकरियों में कटौती की जाएगी.

ये फ़ैसला विदेश मंत्रालय से मिलने वाले कुल अनुदान में 16 फ़ीसदी की कमी आने के बाद लिया गया है.

मार्च के अंत तक बीबीसी हिंदी रेडियो के प्रसारण बंद हो जाएंगे. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने भारत में हिंदी भाषा में शॉर्टवेव के जरिए अपनी रेडियो सेवा को बंद करने का फ़ैसला किया है.

कैरिबियाई देशों के लिए अंग्रेज़ी प्रसारण, अफ़्रीका के लिए पुर्तगाली भाषा में प्रसारण, मैसेडोनियाई और अल्बानियाई और सर्बियाई सेवाएँ बंद कर दी जाएंगी.

इनके अलावा मैडरिन, तुर्की, रूसी, यूक्रेनी, स्पेनिश, अज़ेरी और वियतनामी भाषा के रेडियो प्रसारण बंद हो जाएंगे.

जो शॉर्टवेव प्रसारण बंद होंगे वे हैं- हिंदी, इंडोनिशयाई, स्वाहिली, नेपाली, किर्गिस और ग्रेट लेक्स के इलाक़े में हो रहे प्रसारण.

फ़ारसी भाषा के शाम के रेडियो प्रसारण भी बंद किए जा रहे हैं. साथ ही अंग्रेजी भाषा के कुछ कार्यक्रम भी बंद किए जा रहे हैं.

हालांकि रूसी भाषा के तीन सबसे मशहूर कार्यक्रम इंटरनेट पर जारी रहेंगे. लेकिन रूसी सेवा में काम करने वाले कुल कर्मचारियों में से आधे कर्मचारियों की नौकरी समाप्त हो जाएगी.

कटौती की घोषणा करते हुए बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के प्रमुख पीटर हॉरॉक्स ने बताया कि किन कारणों से ऐसा क़दम उठाया जा रहा है.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के प्रमुख पीटर हॉरॉक्स का कहना है, ''सरकारी फंडिंग में अहम कटौती की वजह से ये परिवर्तन किए जा रहे हैं. हालांकि वर्ल्ड सर्विस की सेवाएँ बरकरार रहेंगी. विश्व भर में फैले अपने स्रोताओं से मिले फीडबैक से हमें मालूम है कि वर्ल्ड सर्विस को दुनिया भर में बेहद सम्मान दिया जाता है इसलिए ये बदलाव लाते हुए हमें दुख हो रहा है.लेकिन फंडिंग की मजबूरियों की वजह से ये परिवर्तन अनिवार्य हो गए थे.''

भारी कटौती

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के इस फ़ैसले के तहत आनेवाले तीन वर्षों में 650 नौकरियां खत्म हो जाएंगी.

ये संख्या वर्ल्ड सर्विस के कुल मौजूदा कर्मचारियों की संख्या की एक चौथाई है.

Image caption नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट ने इन कटौतियों का विरोध किया है

बीबीसी के मुताबिक इस फ़ैसले से वर्ल्ड सर्विस सुननेवाले श्रोताओं की कुल संख्या एक हफ्ते में 18 करोड़ से घटकर 15 करोड़ रह जाएगी यानि श्रोताओं की संख्या में तीन करोड़ की कमी आएगी.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के पूर्व प्रमुख सर जॉन तूसा के मुताबिक मौजूदा फैसले श्रोताओं, ब्रिटेन की विदेश नीति और खुद वर्ल्ड सर्विस के लिए के लिए बेहद दुखद हैं.

ब्रिटेन की नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट ने इन घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

यूनियन के नेता जेरेमी डियर ने कहा है कि ऐसी प्रसारण सेवा जिस पर ब्रिटेन को गर्व है, उसको नष्ट करने से पत्रकारों और बीबीसी के कर्मचारियों का नाराज़ होना जायज़ है.

लेकिन ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग इन कटौतियों को उचित ठहराया है.

ब्रितानी संसद में उन्होंने कहा कि वर्ल्ड सर्विस जितना संभव हो उतनी कार्यकुशलता से चलनी चाहिए और उसकी प्राथमिकताएँ नए बाज़ार, ऑनलाइन और मोबाइल बाज़ार हैं.

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