वापस लौटे अल-बारादेई, सरकार ने की बातचीत की पेशकश

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Image caption अल-बारादेई का कहना है कि वो आवाम का साथ देने के लिए वतन लौटे हैं

मिस्त्र में लगातार जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के तीसरे दिन सरकार ने कहा है कि वो आम लोगों और उनके समर्थन में देश वापस लौटे विपक्षी दल के नेता मोहम्मद अल-बारादेई से बातचीत को तैयार है.

नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के महासचिव सफ़्फात अल शरीफ़ ने कहा कि 'वह समय आ गया है जब लोगों का बात सुनी जाए, लेकिन लोकतंत्र के भी अपने नियम और तरीके होते हैं.'

विपक्षी दल के नेता अल-बारादेई का कहना है कि वो आम लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे इस विरोध में आवाम का साथ देने के लिए वतन वापस लौटे हैं.

उन्होंने कहा, ''मेरी इच्छा तो यही थी कि हमें सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सड़कों पर न उतरना पड़े, लेकिन अगर जनता मुझसे साथ खड़े होने की उम्मीद करती है तो मैं उसे निराश नहीं करुंगा.''

माना जा रहा है कि शुक्रवार को यह प्रदर्शन और हिंसक होंगे क्योंकि सप्ताहांत पर नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिदों में भारी संख्या में लोग इकट्ठा होंगे.

हिंसक हुए प्रदर्शन

इससे पहले मिस्र के कई शहरों में अधिकारियों की चेतावनी को अनदेखा करते हुए हज़ारों सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं और कई जगह से उसके हिंसक हो जाने की ख़बरें आ रही हैं.

राजधानी काहिरा में हज़ारों प्रदर्शनकारियों के साथ हुई झड़पों के बाद लाठीचार्ज किया है और आँसूगैस के गोले छोड़े हैं. कुल मिलाकर सात सौ से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है.

सरकार विरोधी प्रदर्शन: तस्वीरों में

मिस्र में ब्रिटेन के राजदूत ने बीबीसी को बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने एहतियात के साथ कार्रवाई की है लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसके विपरीत कहा है कि पुलिस की ज़्यादतियों की वजह से ही हिंसा भड़की.

इस बीच अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने दोहराया है कि मिस्र की सरकार को राजनीतिक और आर्थिक सुधार लागू करने चाहिए.

चेतावनी

मिस्र में प्रदर्शनों पर क़ानूनी रुप से रोक लगी हुई है.

मिस्र के आंतरिक सुरक्षा मामलों के मंत्री ने इन प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह के प्रदर्शनों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

राष्ट्रपति होस्नी मुबारक मिस्र पर वर्ष 1981 से शासन कर रहे हैं.

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Image caption लोग आपातकाल हटाने की मांग कर रहे हैं

उनकी सरकार विरोध को कम ही बर्दाश्त करती है और विपक्षी दलों के प्रदर्शनों को अक्सर रोक दिया जाता है.

लेकिन अमरीका ने कहा है कि सरकार को प्रदर्शनों पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाना चाहिए.

बीबीसी के काहिरा संवाददाता का कहना है कि सरकार ने इन विरोध प्रदर्शनों पर अपना जाना पहचाना रुख़ अपनाया है और वह राजनीतिक समस्या को क़ानून व्यवस्था की समस्या की तरह देख रही है.

इस बीच समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ख़बर दी है कि प्रदर्शनकारी काहिरा के सेंट्रल कोर्ट कॉम्पलेक्स में एकत्रित हो गए हैं.

उन्होंने स्वेज़ शहर में एक सरकारी इमारत में पेट्रोल बम फेंककर उसमें आग लगा दी है वहीं सत्ताधारी नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्यालय को भी घेर लिया गया है.

एक प्रदर्शनकारी मुस्तफ़ा अल-शफ़ी ने बीबीसी से कहा, "मैं इस तानाशाही का अंत चाहता हूँ. मुबारक के तीस साल बहुत हुए. अब हम आपातकाल से परेशान हो गए हैं. क़ीमतें दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही हैं."

राष्ट्रपति होस्नी मुबारक मिस्र पर वर्ष 1981 से शासन कर रहे हैं.

उनकी सरकार विरोध को कम ही बर्दाश्त करती है और विपक्षी दलों के प्रदर्शनों को अक्सर रोक दिया जाता है.

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