मिस्र में एक और बड़े प्रदर्शन की तैयारी

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Image caption सरकार विरोधी प्रदर्शन कई जगह हिंसक भी हो गए हैं

मिस्र में विपक्षी दल शुक्रवार को सरकार के ख़िलाफ़ एक बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं. संभावना है कि हज़ारों लोग विभिन्न शहरों में इन विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेंगे.

लेकिन सरकार ने सुरक्षा बलों को चौकस कर दिया है और कहा है कि यदि प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे तो उनसे सख़्ती से निपटा जाएगा.

विपक्षी दल के नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद अल-बारादेई सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने मिस्र लौट आए हैं.

इस बीच अधिकारियों ने सबसे बड़े विपक्षी दल 'मुस्लिम ब्रदरहुड' के चार बड़े नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया है.

'मुस्लिम ब्रदरहुड' ने गुरुवार को पहली बार सरकार विरोधी आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा करते हुए कहा था कि वे शुक्रवार की नमाज़ के बाद आंदोलन में शामिल हो जाएँगे.

हालांकि सरकार ने विपक्षी दलों और जनता के प्रतिनिधियों से बातचीत की पेशकश की है. लेकिन सरकार की ओर से विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कोशिशें जारी हैं.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इंटरनेट और मोबाइल फ़ोन पर एसएमएस की सुविधाओं में बाधा आई है.

पिछले तीन दिनों में प्रदर्शनकारियों ने लोगों को एकजुट करने के लिए इंटरनेट पर सोशल नेटवर्किंग साइटों और मोबाइल में एसएमएस का ख़ूब उपयोग किया है.

हालांकि मिस्र में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर रोक है लेकिन पिछले तीन दिनों से हज़ारों प्रदर्शनकारी मिस्र के विभिन्न शहरों में व्यापक प्रदर्शन कर रहे हैं.

कई जगह प्रदर्शन हिंसक भी हो गया है. इन प्रदर्शनों में अब तक सात लोगों की जानें जा चुकी हैं और कई घायल हुए हैं.

एक हज़ार से भी अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

मिस्र की राजधानी काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के सलाहकार उन्हें यह आश्वासन दे रहे हैं कि वे शुक्रवार को होने वाले विरोध प्रदर्शनों को संभाल लेंगे.

इंटरनेट-एसएमएस में बाधा

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Image caption होस्नी मुबारक वर्ष 1981 से सत्तारूढ़ हैं और आरोप है कि उनके शासन काल में विपक्ष को पनपने का मौक़ा ही नहीं दिया गया

ख़बरें हैं कि मिस्र के कई शहरों में शुक्रवार की नमाज़ के बाद आयोजित विपक्षी दलों के बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले इंटरनेट और मोबाइल की एसएमएस सेवा में व्यापक तौर पर बाधा आ रही है.

कुछ लोगों का कहना है कि उनका इंटरनेट बिल्कुल ही काम नहीं कर रहा है.

जबकि कुछ लोगों को अभी सीमित समस्या का सामना करना पड़ रहा है और वे सोशल नेटवर्किंग साइट फ़ेसबुक और ट्विटर का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता माइक फॉक्स का कहना है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों का आयोजन करने वालों को मिस्र और पूरी अरब दुनिया में इंटरनेट से काफ़ी मदद मिली है.

उनका कहना है कि यदि इंटरनेट बंद हो गया तो आगे उन्हें प्रदर्शनों का आयोजन करने में परेशानी हो सकती है.

प्रदर्शनों की तैयारी

मिस्त्र में सरकार ने कहा है कि वो आम लोगों और उनके समर्थन में देश वापस लौटे विपक्षी दल के नेता मोहम्मद अल-बारादेई से बातचीत को तैयार है.

लेकिन दूसरी ओर सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों को किसी भी क़िस्म की छूट देने से इनकार कर दिया है.

सुरक्षा बलों ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें प्रदर्शनकारियों को सख़्ती से रोकने के आदेश दिए गए हैं.

नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के महासचिव सफ़्फात अल शरीफ़ ने कहा, "वह समय आ गया है जब लोगों का बात सुनी जाए, लेकिन लोकतंत्र के भी अपने नियम और तरीके होते हैं."

इस बीच मिस्र वापस लौटे विपक्षी दल के नेता अल-बारादेई का कहना है कि वो आम लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे इस विरोध में आवाम का साथ देने के लिए वतन वापस लौटे हैं.

उन्होंने कहा, ''मेरी इच्छा तो यही थी कि हमें सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सड़कों पर न उतरना पड़े, लेकिन अगर जनता मुझसे साथ खड़े होने की उम्मीद करती है तो मैं उसे निराश नहीं करुंगा.''

माना जा रहा है कि शुक्रवार को यह प्रदर्शन और हिंसक होंगे क्योंकि सप्ताहांत पर नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिदों में भारी संख्या में लोग इकट्ठा होंगे.

माना जा रहा है कि ट्यूनिशिया में सरकार के ख़िलाफ़ हुए जनप्रदर्शनों की सफलता के बाद मिस्र में विपक्षी दलों और जनता ने ये प्रदर्शन शुरु किए हैं.

राष्ट्रपति होस्नी मुबारक मिस्र पर वर्ष 1981 से शासन कर रहे हैं.

उनकी सरकार विरोध को कम ही बर्दाश्त करती है और विपक्षी दलों के प्रदर्शनों को अक्सर रोक दिया जाता है.

बताया गया है कि 82 वर्षीय होस्नी मुबारक विपक्षी दलों और जनता के प्रदर्शनों के बाद से नज़र नहीं आए हैं.

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