मलेशिया के भारतीय नाराज़

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Image caption मलेशिया में भारतीय नाराज़

मलेशिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग सरकार से बेहद नाराज़ है क्योंकि सरकार ने स्कूल के पाठ्यक्रम में भारतीय लोगों के बारे में लिखी बातों को बदलने से मना कर दिया है.

भारतीय मूल के लोगों का कहना है कि ये पाठ्यक्रम उनका अपमान करता है.

पर सरकार का कहना है कि वो उस उपन्यास को पाठ्यक्रम में रखेंगे जिसमें कथित तौर पर भारतीय मूल के लोगों के बारे में ग़लत बातें कहीं गई है.

सरकार का कहना है कि वो उपन्यास के कथित आपत्तिजनक भाग में बदलाव लाने को तैयार है.

पर कुछ भारतीय गुटों का कहना है कि ये दिखाता है कि सरकार उनकी भावनाओं की क़दर नहीं करती.

इस उपन्यास में कहा गया है कि मलेशिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग भारत में रहने वाली सबसे पिछड़ी जाति के वंशज है.

माध्यमिक स्कूलों में सभी बच्चों के पाठ्यक्रम का ये हिस्सा है.

इस पर यहाँ कुछ छोटे प्रदर्शन भी हुए है और ऐसी धमकियाँ भी दी गई है कि अगर सरकार इस उपन्यास को पाठ्यक्रम से नहीं हटाती तो वो इसकी प्रतियां जला देंगे.

बुरा असर

मलेशिया में भारतीय मूल के लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे बड़ी पार्टी का कहना है कि इसे युवा छात्रों को नहीं पढ़ाना चाहिए जिनके दिमाग़ पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. और कुछ छात्र भारतीय मूल के छात्रों का मज़ाक उड़ाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.

उनका कहना है कि ये पुस्तक राष्ट्रीय एकता के लिए ख़तरा है. इस पुस्तक का नाम 'इंटरलौक' है और ये मलेशिया के तीन प्रमुख जातीय समुदायों मलय, चीनी और भारतीयों के मलेशिया आने के इतिहास पर प्रकाश डालती है.

विडंबना ये है कि इस किताब का मक़सद सांप्रदयिक सौहार्द बढ़ाना था.

इस उपन्यास पर जो कड़ा प्रतिरोध हो रहा है उसके पीछे एक कारण ये भी है कि भारतीय अल्पसंख्यक स्वयं को समाज से अलग थलग महसूस कर रहे हैं.

उनमें से कई को लगता है कि सरकार में उनकी आवाज़ नहीं सुनी जा रही है और मलय बहुमत वालों का बोलबाला है.

इसलिए मलेशिया के भारतीय समुदाय का कहना है कि वो इस उपन्यास को स्कूल के पाठ्यक्रम से हटाने के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे.