हिलेरी ने शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन की मांग की

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अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने मिस्र में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन की अपील की है.

उन्होंने कहा है कि अमरीका एक ऐसी सत्ता परिवर्तन के ख़िलाफ़ है जो जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं पर पानी फेर दे.

ये पहली बार है जब अमरीका ने इतने स्पष्ट शब्दों में राष्ट्रपति होशनी मुबारक की सत्ता से हटकर एक अलग लोकतांत्रिक व्यवस्था की बात की है.

अमरीका पिछले कई दशकों से मुबारक की सत्ता का साथ देता रहा है.

तनाव बढ़ा

मिस्र में राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के इस्तीफ़े की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन पर तनाव फिर बढ़ गया है. सेना ने भी सड़क पर बड़ी संख्या में उतरे प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण के लिए और दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया.

काहिरा के सेंट्रल स्क्वेयर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी इकट्ठा है. प्रदर्शनकारियों ने वहाँ घुसने की कोशिश कर रहे सेना के टैंकों को रोक लिया.

सेना के कई हेलिकॉप्टर सेंट्रल स्क्वेयर के आसपास के इलाक़ों में बहुत कम ऊँचाई पर उड़ रहे हैं.

इस बीच विपक्षी नेता अल बारादेई भी प्रदर्शनकारियों का साथ देने सेंट्रल स्कवेयर पर पहुंच गए हैं.

उन्होंने होशनी मुबारक को फ़ौरन सत्ता छोड़ने को कहा है और प्रदर्शनकारियों से कहा है कि "जिस अभियान की शुरूआत हो चुकी है, वो अब वापस नहीं हो सकता."

इस बीच राष्ट्रपति होशनी मुबारक सैन्य मुख्यालय में सेना के वरिष्ठ कमांडरों से मिल रहे हैं. मिस्र पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सरकार ने अरबी टीवी चैनल अल जज़ीरा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है.

सरकारी टीवी ने कहा है कि राष्ट्रपति मुबारक सुरक्षा इंतज़ामों पर पुनर्विचार कर रहे हैं. काहिरा में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात हैं. सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा है.

भारत ने भेजा विशेष विमान

एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि फ़िलहाल तो काहिरा में सैनिक प्रदर्शनकारियों के साथ दोस्ताना तरीके से पेश आ रहे हैं. मंगलवार से मिस्र की राजधानी काहिरा और अन्य जगहों पर हो रहे प्रदर्शनों में अब तक लगभग सौ लोग मारे गए हैं.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चिंता व्यक्त की है. जहाँ अमरीका ने संयम की अपील की है वहीं जापान ने राष्ट्रपति होस्नी मुबारक से प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत करने को कहा है.

ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने मिस्र की सरकार से कहा है कि वह हिंसक प्रतिक्रिया से बचे और जल्द सुधारों को लागू करने को प्राथमिकता दे.

प्रदर्शनों की तस्वीरें

मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने पहली बार उपराष्ट्रपति की नियुक्ती की है जो गुप्तचर सेवा के प्रमुख उमर सुलेमान हैं. वायुसेना के पूर्व प्रमुख अहमद शफ़ीक़ को प्रधानमंत्री बनाया गया है.

लेकिन विपक्षी नेता मोहम्मद अल बारादेई ने इन क़दमों को ख़ारिज किया है और कहा है कि जनता लोगों का बदलाव नहीं बल्कि सत्ताधारी शासन का बदलाव चाहती है.

अल जज़ीरा के ख़िलाफ़ कार्रवाई

मिस्र की सरकार अरबी टीवी चैनल अल जज़ीरा के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है ताकि उसकी पहुँच को सीमित किया जा सके.

सरकारी समाचार एजेंसी ने कहा है कि अल जज़ीरा को आदेश दिया गया है कि वह मिस्र में अपना काम बंद करे. साथ ही मिस्र में उसका लाइसेंस रद्द किया जा रहा है और उसके पत्रकारों को दी गई मान्यता वापस ली जा रही है.

अल जज़ीरा इन प्रदर्शनों की बहुत क़रीब से कवरेज कर रहा है

'भारतीय सुरक्षित'

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार मिस्र में मौजूद लगभग 3600 पर्सन्स ऑफ़ इंडियन ऑरिजिन यानी भारतवंशी लोग सुरक्षित हैं. इनमें से लगभग 2200 लोग काहिरा में हैं.

काहिरा में लूटपाट, निगरानी दल गठित

काहिरा में भारतीय दूतावास ने 24 घंटे का नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है जिसके नंबर हैं - 202-27360556, 202-27360052 और 202-27356168.

भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि मिस्र में वर्तमान स्थिति को देखते हुए जब तक कि अत्यंत ज़रूरी न हो, वे मिस्र न जाएँ.

भारत सरकार ने इन प्रदर्शनों को देखते हुए एयर इंडिया का विशेष विमान भेजकर उन भारतीय मूल के लोगों को वापस लाने का अदेश दिया है जो वापस आने के इच्छुक हैं.

'असली सुधार शुरु हों'

शनिवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने सुरक्षा सलाहकारों के साथ मिस्र की स्थिति पर चर्चा की और बाद में राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में संयम की अपील की गई.

बयान में कहा गया, "राष्ट्रपति ओबामा ने कहा है कि हमारा ध्यान हिंसा का विरोध करने, संयम बरतने, मौलिक अधिकारों की रक्षा करने पर केंद्रित है. साथ ही मिस्र में राजनीतिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए ठोस क़दम उठाए जाएँ."

अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्त फ़िलिप क्रॉली के अनुसार, "वे (प्रदर्शनकारी) अपनी सरकार से असली सुधारों के लिए सार्थक प्रक्रिया शुरु करने की उम्मीद कर रहे हैं. मिस्र की सरकार केवल ताश के पत्तों को फैंटकर अलग खड़ी नहीं रह सकती है. राष्ट्रपति मुबारक ने सुधारों का जो वादा किया है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए."

क्रॉली ने ट्विटर पर एक और संदेश में लिखा है, "मिस्र की गलियों में अब भी प्रदर्शनकारी मौजूद हैं और हमारी चिंता है कि वहाँ हिंसा न भड़के. हम सभी पक्षों से समय बरतने की दोबारा अपील करते हैं."

'लोगों से बातचीत शुरु करें'

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक फ़ोरम की बैठक में मौजूद दुनिया के अनेक नेताओं ने मिस्र की स्थिति पर चिंता जताई है.

जापान के प्रधानमंत्री नाओटो कान ने राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के आहवान किया कि वे अपने लोगों से बातचीत शुरु करें.

कान का कहना था, "वहाँ कुछ सामाजिक अस्थिरता है लेकिन राष्ट्रपति मुबारक ने सुधारों की घोषमा की है. हम उम्मीद करते हैं कि मिस्र की सरकार तत्काल अपने लोगों से बातचीत शुरु करेगी. साथ ही प्रशासन सुधार शुरु करेगा ताकि लोगों की भागीदारी और समर्थन सुनिश्चित किया जा सके."

उधर स्वीडन के विदेश मंत्री कार्ल बिल्ट ने कहा है कि दुनिया की नज़र मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के सुधार एजेंडा पर है, विशेष तौर पर वर्ष 2011 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कराने पर.

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा कि उन्हें लगता है कि राजनीतिक बदलाव की वर्तमान माँग को राका नहीं जा सकते.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन, जर्मनी की चांस्लर एंगिला मर्कल और फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने एक संयुक्त बयान में कहा, "हम राष्ट्रपति मुबारक से अपील करते हैं कि वे किसी भी कीमत पर निशस्त्र नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा के इंस्तेमाल से बचें. हम प्रदर्शनकारियों से अपील करते हैं कि वे अपने अधिकारों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण ढंग से करें."

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