काहिरा में लूटपाट, निगरानी दल गठित

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मिस्र में पिछले पाँच दिनों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों और लूटपाट की घटनाओं के बाद लोगों ने नाकेबंदी शुरू कर दी है और निगरानी दल गठित कर लिए हैं.

ग़ौरतलब है कि मिस्र में लाखों लोग राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के सत्ता में बने रहने के खिलाफ़ सड़कों पर उतर आए हैं.

प्रदर्शनकारी बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और लगातार बढ़ते दामों को लेकर राष्ट्रपति होस्नी मुबारक़ के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उन्होंने शहर में घूम रहे ऐसे अनेक नवयुवकों को देखा है जो हाथों में लोहे की छड़ें और छुरे लिए हुए हैं.

प्रदर्शनों की तस्वीरें

हम मिस्र की जनता के साथ: ओबामा

संवाददाता का कहना है कि शहर की सड़कों से पुलिस लगभग लापता सी हो गई है, इससे अराजतकता जैसी परिस्थिति पैदा हो सकती है.

सेना चुनिंदा स्थानों पर अपना ध्यान केंद्रित किए हुए है, राजधानी काहिरा में प्रदर्शनकारी कर्फ़्यू का उल्लंघन कर बाहर निकल रहे हैं.

कुछ मंत्रालयों के पास से गोलीबारी की ख़बरें आ रही हैं. ख़बरें हैं कि विरोध प्रदर्शनों में अब तक सौ से अधिक लोग मारे गए हैं.

काहिरा के दक्षिण में स्थित बेनी सूफ़ में प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया जिसमें कम से कम 17 लोग मारे गए हैं.

होस्नी मुबारक पर दबाव

इधर मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक पर दुनियाभर से दबाव बढ़ रहा है.

अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे कई देशों ने होस्नी मुबारक से मिस्र में सुधार लागू करने और हिंसा समाप्त करने की अपील की है.

शुक्रवार को हुए प्रदर्शनों के बाद अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लोकतंत्र के हक में मिस्र की जनता को अपना समर्थन देने की घोषणा की.

शनिवार को ओबामा ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक बैठक की और मिस्र पर विचार विमर्श किया.

इसके बाद व्हाइट हाउस से वक्तव्य जारी कर मुबारक से अपील की गई है कि 'वो प्रदर्शनकारियों के साथ संयम बरतें, उनके मानवाधिकारों की रक्षा करें और राजनीतिक सुधारों के लिए जल्द क़दम उठाएं.'

इसी तरह की अपील ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस की ओर से भी की गई है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्कल और फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर कहा, ''हम राष्ट्रपति होस्नी मुबारक से अपील करते हैं कि किसी भी कीमत पर वो निहत्थे नागरिकों पर बल का प्रयोग न करें, ताकि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार के सामने रख सकें.''

नए प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति

मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने सुधार की मांगों के बीच नई सरकार का गठन करते हुए देश में नए प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति को नियुक्त किया है.

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Image caption राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ विरोध बढ़ता जा रहा है

देश में चल रहे ज़ोरदार विरोध प्रदर्शनों के मद्देनज़र उन्होंने कैबिनेट को बर्ख़ास्त कर दिया था.

पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री अहमद शफ़ीक़ को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है. देश के ख़ुफ़िया प्रमुख उमर सुलेमान को उप राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है.

होस्नी मुबारक के 30 वर्षों के शासनकाल में ये पहला मौक़ा है, जब किसी को उप राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है. उमर सुलेमान को राष्ट्रपति का क़रीबी माना जाता है.

बीबीसी संवाददाता जॉन सिंपसन के अनुसार जनरल सुलेमान की नियुक्ति से राष्ट्रपति मुबारक को सेना के साथ साथ पश्चिमी और अरब मित्र राष्ट्रों का समर्थन हासिल होगा क्योंकि मध्यपूर्व वार्ता में सुलेमान मध्यस्थ की भूमिका निभा चुके हैं.

सिंपसन के अनुसार लोग अब भी राष्ट्रपति मुबारक को सत्ता से हटाने की अपनी मांग पर अब भी अड़े हुए हैं.

मिस्र के विपक्षी नेता मोहम्मद अल बारादेई ने कहा है कि मिस्र की जनता सिर्फ राष्ट्रपति होस्नी मुबारक का इस्तीफा चाहती है.

उन्होंने कहा, ''हमारी मुख्य मांग यही है कि मुबारक ये घोषणा करें कि वो सत्ता छोड़ रहे हैं या फिर ये कि वो खुद को दोबारा राष्ट्रपति नियुक्त नहीं करेंगे.''

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