अरबी घमासान की जड़ें

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अरब दुनिया की व्यवस्था चरमरा रही है. लेकिन ये धराशायी होगी या स्वयं को किसी तरह से बचा पाएगी, ये कहना आसान नहीं है.

उत्तरी अफ़्रीका से अरब की खाड़ी तक, अमीर और ग़रीब देशों के सभी अरब शासक ख़ुद को एक जैसी ही स्थिति में पा रहे हैं.

लगभग ये सभी शासक भ्रष्ट और निरंकुश सरकारों की अध्यक्षता कर रहे हैं, जिनकी अवाम की नज़र कोई वैधता नहीं है.

ये सभी शासक अब मिस्र के 'रोष के दिनों' को लगातार घबराहट के साथ देख रहे हैं. मिस्र के 82 वर्षीय बीमार शासक होस्नी मुबारक़ की तक़दीर में वो अपना भाग्य देख रहे हैं.

पश्चिमी टीकाकार ठीक ही कह रहे हैं कि ये विरोध 'उनके बारे में' है, हमारे बारे में नहीं.

प्रदर्शनकारियों के क्रोध की दिशा दीवालिया हो चुकी अरब व्यवस्था की ओर है ना कि इसराइल, अमरीका या पश्चिम की ओर.

लोकतंत्र या स्थिरता?

अरब तानाशाहियों में पश्चिम भी भागीदार रहा है.

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Image caption पश्चिमी देशों ने अरबी दुनिया में लोकतंत्र की जगह हमेशा स्थिरता को चुना है.

दशकों से अमरीकी और यूरोपीय नेताओं ने इस क्षेत्र में लोकतंत्र की जगह स्थिरता को चुना है. अब उस नीति का ख़ामियाजा भुगतने की बारी है.

पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने थोड़े वक़्त के लिए मध्य-पूर्व में 'स्वंत्रतता का एजेंडा' चलाना चाहा था लेकिन वे असफल रहे और बूढ़ हो रहे अरब तानाशाहों ने एक बार फिर राहत की सांस ली थी.

अब बराक ओबामा समेत पश्चिमी नेता अरब जगत के घटनाक्रम के दर्शक मात्र बन कर रह गए हैं. तेज़ी से बदलते हालात एक ऐसे परिणाम की ओर बढ़ रहे हैं जिसका किसी को कोई अनुमान नहीं.

बाक़ी लोग भी दर्शक ही हैं, चाहे वो इसे माने या नहीं.

ईरान को लग रहा है कि अरबी जनता देरी से ही सही, आयोतुल्लाह ख़ोमेनी की क्रांति के उदाहरण पर चल रही है.

वास्तव में अगर युवा प्रदर्शनकारियों का कोई 'रोल मॉडल' है तो वो लोकतांत्रिक तुर्की है ना कि ईरान.

अल-क़ायदा इस सारे घटनाक्रम का महज़ तमाशबीन है. अल-क़ायदा का अरब और मुस्मिल दुनिया में असंतोष की आवाज़ होने का दावा धरा रह गया है.

कल किस का है?

विश्लेषकों को भी थोड़ी विनम्रता दिखाने की ज़रुरत है.

मेरा अनुमान है कि ये 'अरब के बसंत' की शुरूआत नहीं बल्कि ये कुछ अफ़रा-तफ़री वाला और लंबा चलने वाला दौर लगता है.

पुरानी व्यवस्था में अब भी लड़ने की काफ़ी ताक़त है.

अरबी दुनिया के भविष्य की जंग जारी है.

और क्योंकि बहुत कुछ दांव पर है, भीषण संघर्ष होने के आसार है.

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