दो गज़ ज़मीन भी न मिली

जनरल पाओ का अंतिम संस्कार इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption वैसे जनरल पाओ का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जा रहा है

वियतनाम युद्ध में जनरल वैंग पाओ ने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए समर्थित सेना का नेतृत्व किया था.

लेकिन अब अमरीकी सेना ने उन्हें दफ़नाने के लिए आर्लिंगटन वर्जीनिया स्थित अपनी क़ब्रगाह में जगह देने से इनकार कर दिया है.

जनरल पाओ की पिछले महीने कैलिफ़ोर्निया में मृत्यु हो गई थी, जहाँ वे कई दशक रहे.

सेना से अनुरोध किया गया था कि जनरल पाओ को पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उस क़ब्रगाह में दफ़नाने की अनुमति दी जाए.

इस क़ब्रगाह में सेना परंपरागत रुप से युद्ध में मारे गए अपने सैनिकों को दफ़नाती है.

हीरो

लाओस के मॉन्ग समुदाय के लोगों के बहुत से लोगों के लिए जनरल वैंग पाओ हीरो की तरह रहे हैं.

उन्होंने वियतनाम में कम्युनिस्ट शासन के ख़िलाफ़ हुए युद्ध में सीआईए समर्थित सेना के हज़ारों सैनिकों का नेतृत्व किया था.

लाओस की शाही सरकार को अमरीका का समर्थन था लेकिन वर्ष 1975 में उसका पतन हो गया था.

उस समय जनरल पाओ सहित कई सैन्य अधिकारी अमरीका भाग गए थे.

वे नेतृत्व संभालते रहे और अपने समुदाय के सैकड़ों लोगों की पुनर्वास में सहायता की.

Image caption जनरल पाओ ने अपने समुदाय के लोगों की भी बहुत सहायता की है

अमरीका में मॉन्ग समुदाय के लोगो की आबादी ढाई लाख के क़रीब है और उनमें से बहुत से लोग कैलिफ़ोर्निया के शहर फ़्रेस्नो में रहते हैं जहाँ जनरल पाओ की 81 वर्ष की उम्र में मृत्यु हुई.

शुक्रवार को मॉन्ग समुदाय का छह दिन का पारंपरिक अंतिम संस्कार कार्यक्रम शुरु हुआ तो उसमें हज़ारों लोग शामिल हुए.

जनरल पाओ का ताबूत अमरीकी झंडे से लिपटा हुआ था.

अमरीकी राजनीतिज्ञ सहित बहुत से लोग चाहते हैं कि जनरल पाओ के लिए इससे अधिक सम्मान मिलना चाहिए.

अमरीकी प्रतिनिधि सभा कांग्रेस के दो सदस्यों ने कहा है कि जनरल पाओ अमरीकी सैनिकों के साथ दफ़न होने के हक़दार हैं.

उन्होंने वर्जीनिया के आर्लिंगटन के सैन्य क़ब्रगाह में उन्हें दफ़नाए जाने का भी आवेदन किया था.

आमतौर पर यहाँ सेवारत राष्ट्रपतियों और सैनिकों को दफ़नाया जाता रहा है.

लेकिन वरिष्ठ सैन्य और असैन्य अधिकारियों की एक समिति ने इस अनुरोध को ख़ारिज कर दिया है.

अधिकारिक रुप से अनुरोध ठुकराने की कोई वजह भी नहीं बताई गई है.

जनरल पाओ के समर्थकों ने इस निर्णय की निंदा की है और इसे चुनौती देने का फ़ैसला किया है.

निर्वसन में रह रहे जनरल पाओ हमेशा ही विवाद में रहे.

वर्ष 2007 में उन पर एक विदेशी सरकार के सत्ता पलट की कोशिश का आरोप लगाया गया था. हालांकि दो वर्ष बाद ये आरोप ख़ारिज कर दिए गए थे.

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