होस्नी मुबारक काहिरा छोड़ गए

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राष्ट्रपति होस्नी मुबारक से तुरंत इस्तीफ़ा देने की मांग कर रहे लाखों लोग मिस्र में विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

ज़्यादातर लोग तहरीर चौक पर जमा हुए हैं लेकिन सरकारी टेलीविज़न के मुख्यालय और राष्ट्रपति निवास के सामने भी हज़ारों लोग एकत्रित होकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

काहिरा के प्रमुख केंद्र

मिस्र में तनाव के माहौल के बीच ख़बरें आई हैं कि होस्नी मुबारक काहिरा छोड़कर शर्म अल-शेख़ चले गए हैं.

कहा जा रहा है कि वे रेड सी रिसॉर्ट में गए हैं जहाँ उनका एक और निवास है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे वहाँ क्यों गए हैं.

उधर सत्तारूढ़ पार्टी के महासचिव होसाम बदरावी अपने पद से इस्तीफ़ा देने जा रहे हैं.

गुरुवार को होस्नी मुबारक के टेलीविज़न पर दिए गए संदेश से पहले बदरावी ने बीबीसी से कहा था कि राष्ट्रपति मुबारक के लिए सही क़दम पद छोड़ देना ही होगा.

तस्वीरें: गो मुबारक गो

सरकारी टेलीविज़न का कहना है कि राष्ट्रपति कार्यालय कोई महत्वपूर्ण घोषणा करने जा रहा है.

बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन का कहना है कि दो हफ़्ते पुराने इस प्रदर्शन का यह सबसे ख़तरनाक क्षण है.

इस बीच सेना ने आश्वासन दिए हैं कि वर्तमान परिस्थितियों के ख़त्म होने के बाद वह सुनिश्चित करेगी कि 30 साल से लागू आपातकालीन क़ानून हटाए जाएँ और लोकतंत्र की स्थापना के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हों.

प्रदर्शन

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Image caption काहिरा में अब तक की सबसे भीड़ जमा होने के आसार दिख रहे हैं

इससे पहले भी शुक्रवार को लोगों की भारी भीड़ एकत्रित होती रही है लेकिन ख़बरें हैं कि इस बार पहले की तुलना में बहुत अधिक लोग जमा हो चुके हैं.

प्रदर्शनकारी इस बात से बेहद नाराज़ हैं कि मुबारक ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया है.

लोग काहिरा के मध्य में तहरीर चौक पर प्रदर्शन कर रहे हैं और होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं. संवाददाताओं का कहना है कि वहाँ माहौल अपेक्षाकृत शांत है.

लेकिन सरकारी टेलीविज़न के मुख्यालय और राष्ट्रपति निवास के सामने का माहौल तनाव से भरा हुआ है जहाँ हज़ारों लोग प्रदर्शन करने के लिए जमा हुए हैं.

बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन का कहना है कि इससे प्रदर्शनकारियों और सेना के बीच सीधे संघर्ष की स्थिति बन सकती है.

दुनिया भर में संशय

ऐसे में सेना के जनरलों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी लेकिन सवाल यह है कि क्या सेना के जूनियर अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का पालन करेंगे यदि उन्हें प्रदर्शनकारियों को तितरबितर करने के आदेश दिए जाते हैं.

इस बीच मिस्र के विपक्ष के नेता अल-बारादेई ने आशंका जताई है कि अब वहाँ स्थिति विस्फोटक हो सकती है.

उन्होंने अब हिंसा की आशंका जताई है.

ख़बरें हैं कि लोग अलेक्ज़ेंड्रिया और स्वेज़ शहरों में भी हज़ारों की संख्या में जमा हुए हैं.

सेना का आश्वासन

मिस्र के सरकारी टेलीविज़न ने सेना का एक बयान प्रसारित किया है.

इस बयान में कहा गया है कि यदि मिस्र की वर्तमान परिस्थितियाँ ख़त्म होती हैं तो वह ये सुनिश्चित करेगी कि 30 साल से लागू आपातकालीन क़ानून हटा लिए जाएँ.

सेना ने कहा है कि वह आवश्यक संवैधानिक सुधारों के बाद एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक समाज के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेगी.

सेना ने यह आश्वासन भी दिया है कि जिन लोगों ने भ्रष्टाचार को ख़ारिज करते हुए सुधारों की मांग की है उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.

सेना ने राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसमें कहा गया है कि वे अपनी शक्तियाँ उप राष्ट्रपति उमर सुलेमान को सौंप देंगे और संविधान संशोधन करके निष्पक्ष राष्ट्रपति चुनाव करवाएँगे.

सेना ने लोगों से अपील की है, "ज़रुरत है कि सरकारी संस्थानों में कामकाज सुचारू रुप से होने लगे और सामान्य जनजीवन बहाल हो. हमें लोगों के हितों और संपत्तियों की रक्षा करनी चाहिए."

पद छोड़ने से इनकार

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Image caption होस्नी मुबारक से दुनिया भर के नेता अपील कर चुके हैं कि वे मिस्र के लोगों की बात सुनें

जब यह घोषणा हुई कि राष्ट्रपति मुबारक टेलीविज़न पर राष्ट्र के नाम संदेश देंगे तो यह माना जा रहा था कि वे पद छोड़ने की घोषणा करेंगे.

लेकिन अपने संबोधन में होस्नी मुबारक ने कहा कि वे सितंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले वे पद नहीं छोड़ने वाले हैं. हालांकि उन्होंने कहा है कि वे अपने कुछ अधिकार उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान को सौंपने जा रहे हैं.

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे अपने कौन से अधिकार उपराष्ट्रपति को सौंपेंगे.

विश्लेषकों का कहना है कि होस्नी मुबारक की घोषणा से अनिश्चितता और भ्रम बढ़ गया है.

अमरीका सहित दुनिया भर के देशों के नेताओं ने पद छोड़ने से इनकार करने की होस्नी मुबारक की घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, ''यह साफ़ नहीं है कि अधिकारों का हस्तांतरण तुरंत होगा या कुछ समय बाद, साथ ही यह भी देखना होगा कि यह कितना प्रभावी और संतोषजनक साबित होगा.''

उन्होंने कहा कि मिस्र की सरकार अब तक इस संकट का कोई विश्वसनीय, ठोस और लोकतांत्रिक हल सामने नहीं रख पाई है. सरकार के लिए ज़रूरी है कि वो विरोध के इन स्वरों को दबाने के लिए किसी भी रुप में निरंकुश न हो.

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