हिनाः यह मेरी ज़िंदगी है

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Image caption बेटी का पश्चिमी पोशाकें पहनना, सिगरेट पीना पिता को नागवार गुज़रा

हिना सलीम के बारे में किताब छपी है. शीर्षक है 'हिनाः यह मेरी ज़िंदगी है'.

हिना को क़ीमत चुकानी पड़ी थी. इस बात की कि वह पश्चिमी रंग में कैसे रंग गई.

उत्तरी इटली में रहने वाली पाकिस्तानी मूल की इस बीस वर्षीया युवती को उसके पिता ने बेरहमी से मार दिया. उसका कहना था, "ऐसा परिवार की इज़्ज़त बचाने के लिए किया गया".

'परिवार का सिर झुका दिया'

मोहम्मद सलीम ने कहा कि हिना के जीने का तरीक़ा उन्हें पसंद नहीं था और उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि उसने परिवार को 'शर्मसार' कर दिया था.

पिता ने अपनी बेटी का गला काट दिया. 28 बार चाक़ू का वार करके.

अब उनका कहना है, "मैं उसे मारना नहीं चाहता था. मैं चाहता था वह घर लौट आए".

सलीम ने बीबीसी से यह बातचीत अपने जेल के कक्ष में की जहाँ वह 30 साल की क़ैद की सज़ा भुगत रहे हैं.

मोहम्मद सलीम का कहना है, "मैं एक अच्छा पिता हूँ. मेरी बेटी भी पहले बहुत, बहुत, बहुत अच्छी थी. फिर अचानक वह बदल गई. वह एक एशियाई लड़की के रूप में इटली आई थी लेकिन फिर वह एक पश्चिमी औरत बन गई".

उसने घरवालों की मर्ज़ी से शादी करने से इनकार किया, वह सिगरेट पीती थी और अपने इतालवी ब्यॉय फ़्रेंड के साथ रहती थी.

हिना के लिए यह सब कुछ सामान्य था, पिता के लिए यह ग़द्दारी.

मोहम्मद सलीम को यह सब पाकिस्तानी समाज में अपनी साख, इज़्ज़त और प्रतिष्ठा को ठेस जैसा लगा.

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Image caption बेटी की गर्दन पर 28 बार वार किया मोहम्मद सलीम ने

उनकी नज़र में हिना जैसी 'बिगड़ी' हुई लड़की एक अस्वीकार्य चुनौती थी. उनके मुताबिक हिना अपनी जड़ों, परंपराओं, संस्कृति और मज़हब को धोखा दे रही थी.

और फिर सलीम ने उसे जान से मारने की ठान ली.

जीवन पर किताब

पहले पिता की लाडली बेटी और फिर उसीके हाथों बेरहमी से मारी जाने वाली युवती की इस दास्तान पर एक किताब लिखी गई है, 'हिनाः यह मेरी ज़िंदगी है'. इसके लेखकों में से एक मार्को वेंचुरा का कहना है कि यह परिवार जबसे इटली आया तब से ही पिता-पुत्री में ठन गई थी.

उनका कहना है, "यह संस्कृतियों के बीच का टकराव था और साथ ही दो पीढ़ियों की आपसी कशमकश भी".

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Image caption हिना को मार कर घर के पिछवाड़े ही दफ़ना दिया गया.

हत्या की योजना हालाँकि सलीम के दिमाग़ की उपज थी लेकिन हिना को अपने घर के पीछे के लॉन में दफ़नाने में उन्हें अपने कई संबंधियों से सहायता मिली.

दफ़न करने की जगह के बारे में सलीम तर्क देते हैं, "जब वह मर गई तो मैं बस यही चाहता था कि उसे वापस घर ले आऊँ".

परिवार उजड़ गया

सलीम अब कहते हैं कि उन्हे हिना को जान से मारने पर पछतावा है. इसलिए नहीं कि उन्होंने अपनी बेटी खो दी. इसलिए कि इसके बाद उनका परिवार बिखर गया.

वह कहते हैं, "हिना ही नहीं मरी, मेरा पूरा परिवार मर गया. बेटे के बिना, पत्नी के बिना यह क्या ज़िंदगी है".

हिना सलीम की हत्या इस तरह की एकमात्र घटना नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष का कहना है कि दुनिया भर में हर साल पाँच हज़ार लड़कियाँ और महिलाएँ इज़्ज़त के नाम पर अपने घरवालों के हाथों मौत का शिकार होती हैं.

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