ब्रिटेन में वोट नहीं दे पाएंगे क़ैदी

हाउस ऑफ़ कॉमंस
Image caption ब्रिटिश संसद

ब्रिटेन के सांसदों ने मानवाधिकारों के यूरोपीय न्यायालय के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जेल मे बंद कैदियों के मतदान पर रोक को जारी रखने का फैसला किया है.

सरकार की दलील थी कि अगर वह कैदियों के मतदान पर लगी रोक को समाप्त नहीं करती तो उस पर करोड़ों पाउंड का जुर्माना लगाया जा सकता है. फिर भी सरकार की ओर से पेश किए गए विधेयक के पक्ष में 22 और विपक्ष में 234 मत पड़े.

वरिष्ठ टोरी नेता डेविड डेविस और पूर्व गृह मंत्री जैक स्ट्रॉ ने विधेयक पेश करते हुए मंत्रियों से अपील की कि वह मानवाधिकारों के यूरोपीय न्यायालय के उस फ़ैसले का विरोध करें जिसमें कहा गया था कि कैदियों के मतदान पर लगा प्रतिबंध ग़ैरक़ानूनी है.

'सदन की गहरी भावनाएं'

स्ट्रॉ ने कहा, ''मैं मतों के भारी अंतर और सदन की गहरी भावनाओं दोनों से ख़ुश हुआ हूँ. यह एक गंभीर और विचारशील बहस थी. विधेयक की भाषा में बहुत सावधानी बरती गई थी ताकि सरकार के हाथ मज़बूत हो सकें और यूरोपीय अदालत से कहा जा सके कि इस मुद्दे पर हाउस ऑफ़ कॉमंस में सारगर्भित बहस कराई जा चुकी है.''

बहस के दौरान डेविस ने कहा कि वो यह नहीं मानते कि क़ैदियों को मतदान का अधिकार मिलने से अपराधों में किसी तरह की कमी आएगी.

उन्हें यह बीच का रास्ता भी मान्य नहीं कि एक वर्ष से कम सज़ा काट रहे क़ैदियों को मतदान करने दिया जाए, क्योंकि इससे उन हज़ारों क़ैदियों को मतदान करने का मौका मिल जाएगा जिन्होंने गंभीर अपराध किए हैं. इसका लोगों पर उलटा असर पड़ेगा.

'प्रतिबंध ग़ैर क़ानूनी'

बहस के दौरान प्रधानमंत्री डेविड केमरून ने कहा कि वह इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं कि ब्रिटेन को अपनी नीति क्यों बदलनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ''मैं प्रधानमंत्री हूँ और हम ऐसी स्थिति में हैं जब अदालतें हमसे लगातार कह रही हैं कि हम अपनी नीतियां बदलें वरना हम पर जुर्माना किया जाएगा. यह पूरी तरह से असंतोषजनक है. मेरे विचार से कैदियों को वोट नहीं डालने दिया जाना चाहिए, लेकिन हमें इसका कोई समाधान निकालना होगा.''

फिलहाल ब्रिटेन में क़ानूनन रिमांड पर लिए गए कैदी ही मतदान कर सकते हैं.

2005 में मानवाधिकारों की यूरोपीय अदालत ने फ़ैसला सुनाया था कि क़ैदियों पर यह प्रतिबंध ग़ैर क़ानूनी है और ब्रिटेन की सरकार से कहा था कि वह क़ानून में ज़रूरी परिवर्तन करे.

मताधिकार पर हुए इस मतदान को बावजूद ब्रिटेन के कई प्रमुख सांसदों ने चेतावनी दी है कि ब्रिटेन यह चुन नहीं सकता कि वह यूरोपीय क़रार के किन प्रावधानों के लागू करे और किन को छोड़ दे.

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