अल्जीरिया, यमन में सरकार विरोधी प्रदर्शन

अल्जीरिया

अल्जीरिया में हाल में सरकार विरोधी कई प्रर्दशन हुए हैं.

मिस्र की क्रांति के ठीक दूसरे दिन अल्जीरिया और यमन में आयोजित सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबा दिया गया है.

पुलिस ने राजधानी अल्जीयर्स में बेहतर परिस्थितियों और अधिक राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग कर रहे हज़ारों आंदोलनकारियों को तितर-बितर कर दिया.

ये लोग राष्ट्रपति अब्दल अज़ीज़ बूतेफ़्लिका के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे थे.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

दूसरी ओर यमन की राजधानी सना में सरकार समर्थकों ने आंदोलनकारियों पर हमला कर दिया.

प्रदर्शन कर रहे लोग राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे.

ट्यूनीशिया में हुए सफल आंदोलन के बाद कई अफ्रीकी और अरब देशों में लोकतंत्र समर्थक रैलियाँ हो रही हैं.

मिस्र की क्रांति को भी इसी से प्रेरित बताया गया है जहाँ 18 दिनों के प्रदर्शनों के बाद 30 वर्षों से सत्ता में बने रहे होस्नी मुबारक ने शु्क्रवार को पद त्यागने का ऐलान किया था.

कड़ा रूख़

अल्जीयर्स से बीबीसी संवाददाता क्लो आर्नल्ड का कहना है कि हुकूमत किसी तरह की रियायत बरतने के मूड में नहीं दिखती और शनिवार की रैली को रोकने के लिए शहर में क़रीब 30 हज़ार दंगा निरोधी पुलिस की तैनाती की गई थी.

दंगा पुलिस के अलावा शहर के प्रमुख जगहों पर हथियारों से लैस ट्रक खड़े थे और हवाई निगरानी के लिए हेलिकॉप्टर मौजूद थे.

अल्जीरिया

हुकुमत प्रर्दशनकारियों से सख़्ती से निपट रही है

प्रदर्शनकारियों को शहीद चौक से लगभग पाँच किलोमीटर पहले ही रोक लिया गया.

हालांकि दोपहर बाद प्रदर्शनकारियों की संख्या मामूली रह गई थी लेकिन आंदोलनकारियों ने रैली को सफल बताया.

अल्जीरिया में 1992 से आपातकाल लागू है जिसके तहत वहाँ किसी भी तरह की सरकार विरोधी रैली प्रतिबंधित है.

इस साल की शुरुआत में ही महंगाई के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए थे और बूतेफ़्लिका ने इसे कम करने का वादा किया था.

'अब अली की बारी'

यमन की राजधानी सना में रैली की शुरआत कुछ सरकार विरोधी छात्रों के मिस्र के दूतावास की ओर पैदल यात्रा से शुरू हुई जिसमें और लोग भी शामिल होते गए और जिनकी संख्या दूतावास पहुंचने तक हज़ारों में पहुँच गई.

प्रदर्शनकारी ज़ोर-ज़ोर से "मुबारक गए, अब अली की बारी" के नारे लगा रहे थे.

लेकिन इसी बीच लाठियों और हथियारों से लैस राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के समर्थकों ने उनपर धावा बोल दिया जिसके कारण प्रदर्शनकारियों को वहाँ से भागना पड़ा.

अब्दुल्लाह सालेह ने हाल में वादा किया है कि वो 2013 में अपने पद से हट जाएंगे.

साथ ही उन्होंने विरोधी राजनीतिक दलों से कहा है कि वो राष्ट्रीय सरकार में शामिल हों.

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