'मिस्र का असर सीमा पार भी होगा'

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Image caption अरब में आंदोलन की तेज़ होती आवाज़ पश्चिमी देशों में चर्चा का विषय बनी हुई है

दुनिया के विभिन्न देशों ने जनता के प्रदर्शनों के बाद 30 साल सत्ता में रहे होस्नी मुबारक के मिस्र के राष्ट्रपति पद से इस्तीफ़े का स्वागत किया है. अमरीका, ब्रिटेन, भारत, यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र ने इस बारे में प्रतिक्रिया दी है.

अमरीका के उप-राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मुबारक के सत्ता छोड़ने के फै़सले को मध्य-पूर्व के लिए 'निर्णायक क्षण' बताया है. उन्होंने कहा है कि मिस्र की घटना का असर उसकी सीमाओं के बाहर भी महसूस किया जाएगा.

उन्होंने पूरे आंदोलन में सोशल नेटवर्किंग साईटस की अहम भूमिका पर भी टिप्पणी की है.

भारत ने स्वागत किया

भारत ने भी मुबारक के सत्ता छोड़ने के फ़ैसले का स्वागत किया है.

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने एक बयान में कहा है कि वो जनता की भावनाओं की कद्र करते हुए मुबारक के गद्दी छोड़ने के फ़ैसले का स्वागत करते हैं.

भारत और मिस्र के बीच गहरे संबंधों की बात को दुहराते हुए कृष्णा ने मिस्र में शांति और स्थिरता कायम होने की उम्मीद जताई.

जनता की आवाज़: मून

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने अपनी प्रतिक्रया में कहा है कि मुबारक को मिस्र की जनता की आवाज़ आख़िरकार सुननी ही पड़ी.

उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए मिस्र की जनता को बधाई दी.

वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन कहा कि ये एक अनूठी घड़ी है जिसका इस्तेमाल मिस्र में प्रजातंत्रिक व्यवस्था के निर्माण के लिए किया जाना चाहिए. जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने इस 'ऐतिहासिक क्षण' पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वो मिस्र की जनता के हर्ष को समझ सकती हैं.

लेकिन साथ ही उन्होंने इसराइल और मिस्र के बीच की 1979 की शांति संधि को बरक़रार रखने की बात भी कही है.

इसराइली अधिकारियों ने आशा जताई है कि सत्ता में बदलाव का असर दोनों देशों के बीच की शांति संधि पर नहीं पड़ेगा.

फ़लस्तीन पर चिंता

अमरीका और यूरोपीय देश इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ये आंदोलन फ़लस्तीन के मामले पर किस तरह का असर डालेगी.

इस मामले पर हाल में म्युनिख़ में एक बैठक भी हुई जिसमें अमरीका, रूस और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि शामिल थे.

इसी बीच, गज़ा में भी होस्नी मुबारक़ के इस्तीफ़े की ख़बर के बाद जश्न का माहौल है और वहाँ ख़ुशी जताने के लिए हवा में गोलियाँ चलाई गई हैं.

यूरोपीय संघ के विदेश नीति की प्रमुख कैथरीन एशटन ने कहा कि देश में व्यापक जनाधार वाली सरकार के निर्माण के लिए बातचीत शुरू की जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ इस मामले में हर तरह की मदद को तैयार है.

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Image caption मुबारक के पद छोडने की ख़बर सुनकर मिस्रवासियों की भावनाएं उमड़ पड़ीं

स्वीटज़रलैंड की सरकार ने कहा है कि वो वैसे खाते बंद कर रही है जो मुबारक के हो सकते हैं.

सकारात्मक क़दम: ईरान

ईरान ने जहां इसे महान जीत बताया है वहीं क़तर की सरकार ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को दिए गए एक बयान में कहा है, "प्रजातंत्र की मांग कर रही मिस्र की जनता के लिए ये एक सकारात्मक क़दम है."

अरब लीग के सेक्रेटरी जनरल अम्र मूसा ने कहा है कि ये देश में सर्वसम्मति बनाने का वक्त है.

जीवन की अहम घड़ी: बारादेई

मिस्र में विरोधी दल के नेता मोहम्मद अल बारादेई ने मुबारक के पद छोड़ने को अपने जीवन की सबसे अहम घड़ी बताया है.

क़ाहिरा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि 30 वर्षों के दमन के बाद देश आख़िरकार स्वतंत्र हो गया है.

कुछ जगहों पर मुबारक के देश छोड़कर भाग जाने की अफवाहों पर देश के वित्त मंत्री ने विराम लगाने की कोशिश की है.

मिस्र के नव-नियुक्त वित्त मंत्री समीर रज़वान ने बीबीसी से कहा, "होस्नी मुबारक कभी मिस्र नहीं छोड़ेंगे. वह यहीं मरेगें. ये उनका अधिकार है."

इस्लामी विचारधारा रखनेवाले देश के राजनीतिक दल मुस्लिम ब्रदरहुड ने सेना का शुक्रिया अदा किया है जिसने संगठन के अनुसार अपना वादा निभाया है.

टयूनिशिया में ख़ुशी

टयूनिशिया में लोग सड़कों पर नाचते हुए और ज़ोर-ज़ोर से कार के हार्न बजाते देखे गए.

टयूनिशिया में हाल में हुए आंदोलन के बाद वहां के तानाशाह ज़ैनल आब्दीन बिन अली को देश छोड़कर भागना पड़ा था.

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