मिस्र में संसद भंग, संविधान निलंबित

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मिस्र की नई सैन्य परिषद ने कहा है कि देश की संसद को भंग किया जा रहा है. सैनिक अधिकारियों का कहना है कि वे संविधान को भी निलंबित कर रहे हैं.

सेना का कहना है कि नए संविधान के लिए एक आयोग का गठन किया जाएगा. राष्ट्रीय टेलीविज़न पर दिए संदेश में सैन्य परिषद का कहना है कि परिषद छह महीने या नए चुनाव होने तक सत्ता में रहेगी.

दो दिन पहले ही होस्नी मुबारक के राष्ट्रपति पद से त्यागपत्र देने के बाद सैन्य परिषद सत्ता में आई है.

प्रदर्शनकारियों की मांग के बाद सैन्य परिषद ने यह स्पष्ट किया था कि परिषद निर्वाचित सरकार को सत्ता सौंपने को लेकर प्रतिबद्ध है.

दूसरी ओर होस्नी मुबारक के पद छोड़ने के बाद रविवार को कैबिनेट की बैठक हुई और प्रधानमंत्री अहमद शफ़ीक़ ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि वे नई सैन्य परिषद के साथ नई सरकार के गठन पर विचार कर रहे हैं.

संघर्ष

इस बीच राजधानी काहिरा में कई दिनों से होस्नी मुबारक विरोधी प्रदर्शनकारियों का अड्डा रहे तहरीर चौक को ख़ाली कराने के लिए सेना को जूझना पड़ा.

जैसे ही प्रदर्शनकारियों को तहरीर चौक ख़ाली कराने की ख़बर मिली, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वहाँ पहुँच गए. शुरू में आराम से चौक ख़ाली कराने का सेना का अभियान अब खटाई में पड़ता दिख रहा है.

कई प्रदर्शनकारी सैनिकों से बहस कर रहे हैं और सेना उन्हें समझाने-बुझाने में लगी है. तहरीर चौक पर मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन का कहना है कि सेना को ये समझ में नहीं आ रहा है कि वे अब प्रदर्शनकारियों से कैसे निपटें.

कुछ प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि वे उस समय तक तहरीर चौक ख़ाली नहीं करेंगे जब तक प्रस्तावित सुधारों की समयसीमा निर्धारित नहीं की जाती.

एक दिन पहले सेना ने प्रदर्शनकारियों की आपत्ति पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि वे निर्वाचित सरकार को सत्ता सौंपने को लेकर प्रतिबद्ध हैं.

अठारह दिनों तक चले प्रदर्शनों के बाद आख़िरकार 11 फरवरी को होस्नी मुबारक ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

स्वागत

दूसरी ओर अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मिस्र में नागरिक सत्ता स्थापित करने के सेना के बयान का स्वागत किया है और कहा है कि मिस्र में लोकतंत्र की स्थापना से मध्यपूर्व में शांति और स्थिरता बहाल होगी.

इस बीच अमरीका के प्रमुख सैन्य अधिकारी माइक मलेन मध्यपूर्व में अमरीका के सहयोगी देशों से बातचीत के लिए दौरे पर हैं. उनका मकसद मिस्र के बदलते घटनाक्रम पर इन देशों से बातचीत करना है.

सेना ने कहा है कि वो सत्ता की बागडोर देश की निर्वाचित सरकार को सौंपने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि सत्ता हस्तांतरण के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी गई है.

मिस्र में सितंबर में चुनाव होने थे लेकिन सत्ता में बदलाव के बाद ये मालूम नहीं कि चुनाव कब होंगे.

सेना ने वर्तमान सरकार से फ़िलहाल कार्यवाहक सरकार की स्थिति में बने रहने को कहा है. शनिवार को सेना की ओर से दिए गए बयान में ये भी कहा गया कि सभी अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को बरक़रार रखा जाएगा.

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