मिस्र: सेना ने तहरीर चौक खाली कराना शुरू किया

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मिस्र की सेना ने राजधानी काहिरा में तहरीर चौक से प्रदर्शनकारियों को हटाकर इस स्थल को खाली कराने का काम शुरू कर दिया है. तहरीर चौक सरकार विरोधी प्रदर्शनों का केंद्र था.

इसी स्थल पर विरोध प्रदर्शनों के कारण राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को जाना पड़ा था.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सैनिक बिना किसी बल प्रयोग के प्रदर्शनकारियों के टैंट वहाँ से हटा रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि इस इलाक़े के आसपास अब भी हज़ारों लोग डेरा जमाए बैठे हुए हैं.

क्या वाकई मिस्र में कुछ बदलेगा

दूसरी ओर अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मिस्र में नागरिक सत्ता स्थापित करने के सेना के बयान का स्वागत किया है और कहा है कि मिस्र में लोकतंत्र की स्थापना से मध्यपूर्व में शांति और स्थिरता बहाल होगी.

इस बीच अमरीका के प्रमुख सैन्य अधिकारी माइक मलेन मध्यपूर्व में अमरीका के सहयोगी देशों से बातचीत के लिए दौरे पर हैं. उनका मकसद मिस्र के बदलते घटनाक्रम पर इन देशों से बातचीत करना है.

सेना ने कहा है कि वो सत्ता की बागडोर देश की निर्वाचित सरकार को सौंपने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि सत्ता हस्तांतरण के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी गई है.

मिस्र में सितंबर में चुनाव होने थे लेकिन सत्ता में बदलाव के बाद ये मालूम नहीं कि चुनाव कब होंगे.

सेना ने वर्तमान सरकार से फ़िलहाल कार्यवाहक सरकार की स्थिति में बने रहने को कहा है.

शनिवार को सेना की ओर से दिए गए बयान में ये भी कहा गया कि सभी अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को बरक़रार रखा जाएगा.

'अंतरराष्ट्रीय समझौते मान्य'

इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सेना के इस बयान का स्वागत किया है कि 1979 में इसराइल के साथ की गई संधि को बरकरार रखा जाएगा.

नेतन्याहू का कहना है कि यह संधि मध्यपूर्व में शांति और स्थिरता के लिए ज़रूरी है.

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Image caption आंदोलन के दौरान सेना के रवैये के चलते उसके प्रति आम लोग का रवैया सकारात्मक है

इन घटनाक्रम के बीच अधिकारियों ने होस्नी मुबारक के क़रीबी माने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अहमद नाज़िफ़, पूर्व गृहमंत्री हबीब अल आदली की विदेश यात्रा पर रोक लगा दी है.

होस्नी मुबारक: अर्श से फ़र्श

सरकारी टेलीविज़न का कहना है कि तीनों अधिकारियों के खिलाफ़ जांच चल रही है.

इस बीच तहरीर चौक पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा कम हो रहा है हालांकि कुछ का कहना है कि वो तब तक नहीं हटेंगे जबतक सुधारों की समयसीमा और पूरा मसौदा तैयार नहीं हो जाता.

विपक्ष ने भी कहा है कि वो देश में जल्द लोकतंत्र की बहाली के सबूत देखना चाहता है, एक तानाशाह से दूसरे तानाशाह के हाथों सत्ता की सुपुर्दगी नहीं.

एक अन्य घटनाक्रम के तहत मिस्र के शेयर बाज़ार में होने वाली गतिविधियों और व्यापार को तीन और दिनों के लिए टाल दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि शेयर बाज़ार अब बुधवार को खुलेगा.

प्रदर्शनों के चलते शेयर बाज़ार 28 जनवरी को बंद कर दिया गया था.

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