ओबामा ने ईरान की कड़ी आलोचना की

ओबामा इमेज कॉपीरइट AP
Image caption ओबामा ने वाशिंगटन में पत्रकारों के साथ लंबी बातचीत की है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ईरान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि जहां ईरानी अधिकारियों ने मिस्र में मुबारक सरकार के हटाए जाने का स्वागत किया है वहीं अपने नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर बल प्रयोग किया.

वाशिंगटन में संवाददाताओं से बातचीत में राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान में क्या हो रहा है वो अमरीका तय नहीं कर सकता लेकिन अमरीका को उम्मीद है कि ईरान मे और अधिक आज़ादी के लिए लोग अपना संघर्ष जारी रखेंगे.

उन्होंने मिस्र का ज़िक्र करते हुए कहा कि सैन्य प्रशासन ने जो शुरुआती क़दम उठाए हैं वो अच्छे प्रतीत होते हैं.

ओबामा ने मध्यपूर्व के देशों के निरंकुश शासकों से अपील की कि वे मिस्र से सबक लें और अपने देशों में जनता की आवाज़ सुनें.

ओबामा ने कहा कि दुनिया बदल रही है और नेताओं को इस बदलाव की अगुवाई करने होगी.नका कहना था, ‘‘इन समुदायों में वास्तविक बदलाव अभी नहीं होने जा रहा है और उसकी वजह है आतंकवाद, वास्तविक बदलाव न होने की वजह है कि आप निर्दोष लोगों की जान ले रहे हैं. लेकिन अब ये बदलाव दिख रहा है क्योंकि लोग एक साथ आ रहे हैं और बदलाव के लिए उनका नैतिक समर्थन मिल रहा है. ये अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तरों पर दिख रहा है. और यही तरीक़ा है स्थायी तौर पर बदलाव लाने का.’’

अपनी बातों में बराक ओबामा ने एक तरह से अरब देशों के शासकों को चेतावनी भी दी कि यदि वे बदलाव की प्रक्रिया को तेज़ नहीं करते हैं तो उनका भी हश्र वही हो सकता है जो कि मिस्र और ट्यूनीशिया के शासकों का हुआ.

इन सबका लब्बोलुबाब यह कि यदि ऐसा होता है तो उनका साथ देने में अमरीका असमर्थ होगा.

हालांकि ईरान अमरीका का दोस्त देश नहीं है जैसा कि प्रदर्शनों का सामना कर रहे अन्य देश हैं.

इसके बावजूद अमरीका का सरकार विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन करना ये साबित करता है कि अमरीका भी निरंकुश शासन में बदलाव के पूरी तरह साथ खड़ा है.

इस बीच यमन में भी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और हिंसा का दौर अभी जारी है. राजधानी साना में प्रदर्शनकारी पिछले पांच दिनों से राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

सैकड़ों युवा प्रदर्शनकारियों ने पूरे शहर में एक बार फिर मार्च करने की कोशिश की. इस दौरान इन लोगों की राष्ट्रपति के वफ़ादार कार्यकर्ताओं से झड़पें भी हुईं.

दोनों ही पक्षों के लोगों ने एक दूसरे के ऊपर पत्थर फेंके. इन झड़पों में कई लोग घायल हुए हैं जिनमें एक विपक्षी सांसद अहमद सैफ़ हाशिद भी शामिल हैं.

मध्य पूर्व में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों की लहर खाड़ी के देश बहरीन में भी जा पहुंची है. जहां हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं.

यहां भी लोग सरकार के प्रमुख पदों पर शासक अल खलीफ़ा के परिवार के सदस्यों को हटाने की भी मांग कर रहे हैं.

संबंधित समाचार