बहरीन: प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलीं

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बहरीन की राजधानी मनामा में हज़ारों की संख्या में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सेना ने आंसू गैस और घातक हथियारों का इस्तेमाल किया.

ताज़ा खबरों के अनुसार प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच फिर हिंसक झड़पें हुई हैं. इसके जवाब में भीड़ पर काबू पाने के लिए सेना के दस्तों ने प्रदर्शनकारियों पर हमले किए.

प्रदर्शनकारी पर्ल-चौक पर कब्ज़े की कोशिश कर रहे थे. इन झड़पों में कई लोगों के घायल होने की भी ख़बर है.

बहरीन में सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़पों में मारे गए लोगों के जनाज़े में शुक्रवार को हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया. देश में बदलाव और सुधार के अलावा प्रदर्शनकारी 200 साल से बहरीन में राज कर रहे सुन्नी वंश के अंत की मांग भी कर रहे हैं.

अपने साथ तख़्तियाँ लाए लोगों ने सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगाए. लोगों का कहना है कि देश में बदलाव लाने के लिए अपनी जान देने के लिए भी तैयार हैं.

प्रदर्शनकारी सईद ने बीबीसी को बताया, "हिंसा होगी, झड़पें होंगी. बहरीन मानो एक अंधेरी सुरंग से गुज़र रहा है. मैं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हूँ. अगर अधिकारियों को मेरा पूरा नाम पता चल गया तो मेरी नौकरी जा सकती है, या मेरी जान भी जा सकती है."

मनामा शहर में बीबीसी संवाददाता कैरोलाइन हॉली का कहना है कि दो लोगों को एक शिया बहुल इलाक़े में दफ़नाया जा रहा है जहाँ मुख्यत ग़रीब लोग रहते हैं. सेना और पुलिस ने जनाज़े और शोक सभा से दूरी बनाए रखी है. बाक़ी इलाक़ों में टैंक तैनात हैं और माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है

हालांकि सरकार ने सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जुमे की नमाज़ के बाद वे फिर से सड़कों पर उतरेंगे. वहीं सरकार समर्थक लोग भी रैली निकालने की योजना बना रहे हैं.

पश्चिमी देशों में चिंता

पर्ल स्क्वेयर पर गुरुवार को सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने बलप्रयोग किया था. इसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे.

आंतरिक मामलों के मंत्रालय के मुताबिक सैनिकों ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए हैं.

पश्चिमी देशों ने बहरीन से सुधार लागू करने का आग्रह करते हुए कहा है कि वो प्रदर्शनकारियों के साथ नरमी से पेश आएँ.

बीबीसी के मध्य पूर्व मामलों के संवाददाता का कहना है कि सेना का उपयोग ऐसा मुद्दा है जिसे लेकर बहरीन का शाही परिवार और शिया बहुल प्रदर्शनकारी आमने-सामने हैं.

ब्रिटेन से 1971 में आज़ाद होने के बाद बहरीन में संपन्न सुन्नी लोगों और कम संपन्न शिया लोगों के बीच तनाव रहा है. शिया गुटों का कहना है कि वे हाशिए पर हैं और उन्हें दबाया जाता है.

बहरीन को लेकर अमरीका ने भी चिंता जताई है. वैसे तो बहरीन एक छोटा सा देश है जिसकी जनसंख्या 10 लाख से भी कम है.

लेकिन यहाँ अमरीकी जलसेना का बड़ा बीड़ा है और ये देश सऊदी अरब के भी करीब स्थित है जो अमरीका का सहयोगी है.

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