अमरीका ने फ़लस्तीनी प्रस्ताव वीटो किया

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Image caption मोदीन भी क़ब्ज़े वाले क्षेत्र मे बस रही विवादित बस्तियों में से एक है

फ़लस्तीनी क्षेत्र पर इसरायली बस्तियों के निर्माण की निंदा करने वाले फ़लस्तीनी प्रस्ताव को अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र में वीटो कर दिया है

फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन यानि पीएलओ द्वारा अनुसमर्थित इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद के अन्य 14 देशों ने समर्थन दिया है.

मुस्लिम जगत से संबंध बेहतर बनाने का वचन देने वाले ओबामा प्रशासन ने पहली बार वीटो के अधिकार का इस्तमाल किया है.

एक फ़लस्तीनी अधिकारी का कहना था कि अब इसरायलियों के साथ बातचीत की प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाएगा.

रिपोर्टें हैं कि इस प्रस्ताव को वीटो करने के लिए वाशिंगटन पर अमरीकी कांग्रेस और इसरायल का काफ़ी दबाव था.

अमरीकी कांग्रेस में इसरायल समर्थक लॉबी का काफ़ी दबदबा है.

क़ब्ज़े वाले क्षेत्र में इसरायल द्वारा नई बस्तियां बसाने की योजना का विरोध करने वाले ओबामा प्रशासन का ये कहना है कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में लाने से इसरायल और फ़लस्तीनियों के बीच बातचीत बहाल करने की प्रक्रिया और उलझ जाएगी.

पीएलओ के इस प्रस्ताव को कम से कम 130 देशों ने समर्थन दिया है.

इन सभी देशों ने फ़लस्तीनी क्षेत्र पर इसरायली निर्माण कार्य को ग़ैर क़ानूनी बताते हुए इसे दोनों पक्षों में व्यापक शांति के रास्ते की प्रमुख रुकावट बताया है.

दोनों पक्षों का रुख़

पश्चिमी तट के रामल्ला शहर से पीएलओ के महासचिव यासिर आबिद रब्बो ने कहा है कि इस प्रस्ताव पर अमरीका का वीटो लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है.

उनका कहना था कि इससे अमरीकी प्रशासन की साख पर सवाल खड़ा हुआ है.

इसरायल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने अमरीका के इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

उन्होंने ये भी कहा कि इसरायल उस लक्ष्य की प्रप्ति के लिए प्रतिबद्ध रहेगा जिसमें इसरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसे मान्यता के बदले फ़लस्तीनियों की राष्ट्र कहलाने की वैधानिक आकांक्षा का ध्यान रखा जाएगा.

इस प्रस्ताव को समर्थन देने वाले ब्रिटन ने दोनों पक्षों से शांतिवार्ता बहाल करने को कहा है.

मिस्र औऱ अन्य अरब देशों के ताज़ा घटना क्रम के हवाले से ब्रिटन के विदेशमंत्री विलियम हेग ने कहा कि दोनों पक्ष क्षेत्र मे हो रही घटनाओं का असर इसरायली फ़लस्तीनी विवाद के स्थायी और व्यपाक हल पर न पड़ने दें.

विलियम हेग का कहना था "मैं दोनों पक्षों से अपील करता हूं कि वे दो राष्ट्र के फ़ार्मूले पर मौजूद मानदंडों के आधार पर बातचीत जल्द से जल्द शुरू करें."

विलियम हेग ने अरब देशों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर पहले भी चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा था कि इससे मध्य-पूर्व की शांति वार्ता ख़तरे में पड़ सकती है.

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