लीबिया में प्रदर्शन राजधानी त्रिपोली तक फैले

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लीबिया में बेनग़ाज़ी और राजधानी त्रिपोली के अलावा कई और शहरों से भी प्रदर्शनकारियों और सैनिकों के बीच संघर्ष की ख़बरें हैं, लेकिन इस बारे में सूचनाएं बहुत सीमित हैं क्योंकि पत्रकारों को राजधानी त्रिपोली से बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी गई है.

दूसरी लीबिया के नेता के बेटे सैफ़ अल इस्लाम ग़द्दाफ़ी सरकारी टीवी पर आए और उन्होंने कहा कि अलगाववादी आंदोलन से देश की एकता को ख़तरा है.

उनका कहना था कि बेनग़ाज़ी में केवल 14 लोग मारे गए हैं, उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी मीडिया मारे गए लोगों की संख्या बढ़ा चढ़ाकर बता रहा है.

इधर शुरू में लीबिया के पूर्वी हिस्सों से ही प्रदर्शन की ख़बरें आ रही थीं लेकिन अपुष्ट ख़बरों के अनुसार सरकार विरोधी प्रदर्शन की लपटें देश के पश्चिमी हिस्सों तक भी पहुंच चुकी हैं.

राजधानी त्रिपोली से 40 किलोमीटर पश्चिम स्थित एक शहर अज़ ज़ाविया में एक नागरिक ने बीबीसी को बताया कि वहां प्रदर्शनकारियों ने गद्दाफ़ी प्रशासन से जुड़ी कई इमारतों को आग लगा दी जिनमें लीबियाई नेताओं का एक गेस्ट हाउस भी शामिल है.

अपना नाम न बताने की शर्त पर इस नागरिक ने बीबीसी को बताया,''जो भीड़ मैंने देखी उसमें ज़बर्दस्त ग़ुस्सा था. इस वक़्त मैं उस जगह को छोड़ चुका हूं, लेकिन जिस वक़्त मैं वहां था क़रीब 50 हज़ार लोग प्रदर्शन कर रहे थे और गद्दाफ़ी से गद्दी छोड़ने की मांग कर रहे थे. लोग बहुत ग़ुस्से में थे, बहुत ही ज़्यादा. और सभी जगह आग लगा दे रहे थे, उन सभी जगहों को आग के हवाले कर रहे थे जो सरकार से जुड़ी है.''

वहीं लीबिया के बेनग़ाज़ी शहर के डॉक्टरों का कहना है कि स्थिति बहुत ही भयावह है.

एक डॉक्टर का कहना था कि अस्पताल घायलों से पटे पडे़ हैं क्योंकि कम से कम नौ सौ लोग घायल हुए हैं.

संघर्ष

लीबिया के एक वरिष्ठ अधिकारी सलेह इब्राहिम का कहना था कि प्रदर्शनकारियों का व्यवहार शांतिपूर्ण नहीं था और वे विदेशी ताक़तों की शह पर काम कर रहे थे.

सलेह इब्राहिम का कहना था, ''शुरू से ही दिख रहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात महज़ छलावा थी. दरअसल प्रदर्शनकारी सशस्त्र समूह हैं जो कि उन विदेशी जासूसों के साथ काम कर रहे हैं जो कि लीबिया की एकता को खंडित करना चाहते हैं.''

उनका कहना था कि ऐसे कई प्रदर्शनकारी गिरफ़्तार किए गए हैं और सरकारी टेलीविज़न पर उन्हें दिखाया भी जाएगा.

इसके पहले ख़बरें आईं थीं कि लीबिया में सुरक्षाबलों के साथ संघर्ष के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने बेनग़ाज़ी शहर पर नियंत्रण हासिल कर लिया है.

एक अन्य ख़बर के अनुसार लीबिया सरकार ने अफ़्रीकी भाड़े के सैनिक सड़कों पर उतार दिए हैं.

इसके पहले मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राइट्स वॉच' ने कहा था कि हाल में प्रदर्शनकारियों पर मशीनगनों और घातक हथियारों से हमले के बाद मरने वालों की संख्या 170 तक पहुंच गई है.

उन्होंने बताया कि अस्पतालों को हताहतों से निबटने में मुश्किल पेश आ रही है.

हिंसा की आलोचना

ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग ने लीबिया के बेनग़ाज़ी शहर में फ़ायरिंग और हिंसा को 'ख़ौफ़नाक और अस्वीकार्य' बताया है.

उनका कहना था, ''मैंने लीबिया के नेता के बेटे सैफ़ अल इस्लाम ग़द्दाफ़ी से कहा कि सरकार की किसी भी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का सामना करना पड़ेगा.''

लीबिया की राजधानी त्रिपोली से लगभग एक हज़ार किलोमीटर दूर स्थित बेनग़ाज़ी में प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अफ़रातफ़री और अराजकता का माहौल है.

लीबिया में पत्रकारों को राजधानी त्रिपोली से बाहर जाने की इजाज़त नहीं है और इन घटनाओं के कुछ ही विवरण मिल रहे हैं.

मिस्र और ट्यूनिशिया में भीषण विरोध प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद पिछले कुछ दिनों में लीबिया में भी सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं.

लीबिया में पिछले लगभग 41 साल से कर्नल गद्दाफ़ी सत्ता में बने हुए हैं.

मिस्र में 11 फ़रवरी को सत्ता परिवर्तन के बाद से लीबिया में लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन ज़ोर पकड़ रहे हैं.

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