अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा स्थिति बदतर

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Image caption अफ़ग़ानिस्तान में तैनात नेटो के सैनिक

अफ़ग़ानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के संयोजक का कहना है कि तालिबान के सत्ता से हटने के बाद से वहाँ सुरक्षा की स्थिति इस समय सबसे ख़राब है.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी रॉबर्ट वॉटकिंस ने जिनीवा में ने कहा कि सहायता एजेंसियां अब केवल देश के 30 प्रतिशत हिस्से में ही काम कर पा रही हैं क्योंकि सहायता कर्मियों पर हमले बहुत बढ़ गए हैं.

रॉबर्ट वॉटकिंस ने संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यक्रम के प्रमुख के रूप में अफ़ग़ानिस्तान में दो साल बिताए हैं और उनके सामने जिस तरह की बाधाएं आ रही हैं वो उससे बहुत खिन्न हैं.

वॉटकिंस का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में एक लाख 35 हज़ार अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की तैनाती के बावजूद सुरक्षा की स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि सहायता एजेंसियों की पहुंच केवल 30 प्रतिशत हिस्से तक है और दूसरे 30 प्रतिशत हिस्से में वो कभी कभी ही काम कर पाती हैं और बाक़ी देश में वो जा ही नहीं पातीं.

रॉबर्ट वॉटकिंस ने ये भी कहा कि पिछले साल नैटो के सैनिकों की संख्या में हुई वृद्धि के बावजूद स्थितियों में कोई सुधार नहीं हुआ.

उनका कहाना है, “नैटो का दावा है कि उसने प्रगति की है, वो आक्रामक स्थिति में है जबकि विद्रोही प्रतिरक्षात्मक स्थिति में आ गए हैं. लेकिन हम बड़ी गंभीर सुरक्षा समस्याओं से जूझ रहे हैं और मानवीय कार्यकर्ताओं पर हमले बहुत बढ़ गए हैं.”

संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसियों को लगता है कि प्रमुख समस्या ये है कि सेना और मानवीय प्रयासों के बीच की सीमाएं धुंधली होती जा रही हैं.

रॉबर्ट वॉटकिंस ने बताया कि उन्होंने नैटो के कमांडर जनरल डेविड पेट्रीयस से कहा है कि मानवीय आपूर्ति पहुंचाने का काम सेना को नहीं करना चाहिए क्योंकि सहायता कर्मियों को यह दिखाना ज़रूरी है कि वो पूरी तरह से स्वतंत्र हैं.

वॉटकिंस उन दाता देशों से बात करने जिनीवा में हैं जो अफ़ग़ानिस्तान का पुनर्निर्माण होते देखना चाहते हैं लेकिन उनका कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान अब भी एक युद्धक्षेत्र बना हुआ है.

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