गद्दाफ़ी का संघर्ष जारी, विदेशी छोड़ रहे हैं लीबिया

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त्रिपोली शहर और पश्चिमी लीबिया पर नियंत्रण रखने के लिए देश के शासक कर्नल गद्दाफ़ी का संघर्ष जारी है.जबकि प्रदर्शनकारियों ने पूर्वी इलाक़ों में अपनी पकड़ मज़बूत कर ली है.

ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक राजधानी त्रिपोली के ज़्यादातर हिस्से सूने पड़े हैं और केवल गद्दाफ़ी समर्थक बंदूकधारी सड़कों पर घूम रहे हैं जिन्हें प्रदर्शनकारियों को मारने का आदेश दिया गया है.

मिसूरता समेत कई पश्चिमी कस्बों से भी प्रदर्शन की ख़बरें हैं. वहीं पूर्वी कस्बों में प्रदर्शनकारी जश्न मनाते हुए देखे जा सकते हैं.

अब तक के प्रदर्शनों में कम से कम 300 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.त्रिपोली में एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि शहर लगभग बंद पड़ा है. लोगों को उम्मीद है कि पूर्वी कस्बों के प्रदर्शनकारी वहाँ पहुंचकर उनकी मदद करेंगे.

सरकार की ओर से एसएमएस भेजा गया है कि सारे नौकरशाह और अन्य कर्मचारी काम पर वापस आ जाएँ लेकिन ज़्यादातर लोग बाहर निकलने से डर रहे हैं.

त्रिपोली के एक नागरिक ने कहा, “मैं उम्मीद करता हूँ कि लोग काम पर नहीं जाएँगे. ये शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का एक तरीका है. हम अनिश्चितकाल तक घरों में रहेंगे.”

बीबीसी से बातचीत में एक नागरिक ने बताया कि त्रिपोली में कई लोगों की मौत हुई है और डॉक्टरों के मुताबिक बंदूकधारी अस्पतालों में आकर लोगों को मार रहे हैं.लीबिया से आ रही ख़बरों की पुष्टि करना अभी बेहद मुश्किल है.

पलायन जारी

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इस बीच लीबिया से विदेशियों के पलायन का सिलसिला जारी है.लीबिया में स्थिति को देखते हुए भारत सरकार का कहना है कि अगर वहाँ रहने वाले भारतीयों को निकालना पड़े तो इसके लिए सरकार योजना बना रही है. लीबिया में करीब 18 हज़ार भारतीय हैं.

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा है कि सरकार लीबिया, यमन और बहरीन की स्थिति पर नज़र रखे हुए है.

चीन, अमरीका और कई यूरोपीय देश अपने नागरिकों को लीबिया से निकालने के लिए विमान और समुद्री जहाज़ भेज रहे हैं.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो ब्रिटेन बिना अनुमित के लीबिया में अपना सैन्य विमान भेजने से नहीं कतराएगा. लीबिया के पास एक ब्रितानी युद्धपोत भेजा जा रहा है.

तुर्की अपने पांच हज़ार लोगों को लीबिया से निकाल चुका है.लीबिया में 10 लाख से ज़्यादा अफ़्रीकी आप्रवासी भी काम करते हैं जो वहाँ फँसे हुए हैं.

लेकिन आप्रवासन के लिए बने अंतरराष्ट्रीय संगठन के प्रवक्ता का कहना है कि इन लोगों के पास इतने पैसे नहीं है कि लीबिया से बाहर निकल पाएँ.

अफ़्रीकी यूनियन ने लीबिया में लोगों के ख़िलाफ़ व्यापक पैमाने पर बलप्रयोग की कड़ी निंदा की है.

इस बीच रोम में एक आपात सम्मेलन बुलाया गया था जिसमें फ्रांस, इटली, स्पेन और ग्रीस ने हिस्सा लिया. ये सभी देश बड़े पैमाने पर लोगों ने इनके यहाँ आने को लेकर चिंतित हैं. इन देशों को चिंता है कि इसे यूरोपीय संघ की सुरक्षा को ख़तरा पैदा हो सकता है.

इटली के मंत्री ने बताया कि पिछले महीने ट्यूनीशिया में हुए प्रदर्शनों के बाद वहाँ से से छह हज़ार से ज़्यादा लोग इटली पहुंच चुके हैं जबकि तीन हज़ार से ज़्यादा लीबियाई यूरोप में प्रवेश करने की कोशिश कर सकते हैं.

उधर अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा ने लीबिया में हो रही हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हिंसा तुरंत बंद होनी चाहिए.

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