लीबिया; अप्रवासियों पर यूरोप में मतभेद

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यूरोपीय देशों के आंतरिक मामलों के मंत्रियों का कहना है कि लीबिया और उत्तरी अफ़्रीका से भागकर यूरोप आने वाले लोग यूरोप के लिए एक बड़ी समस्या है.

लेकिन इस समस्या से निपटने के लेकर काफ़ी मतभेद सामने आ रहे हैं.

ब्रसेल्स में हुई बैठक में भूमध्य से लगे इटली जैसे देशों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में आप्रवासन से देश का ढाँचा चरमरा जाएगा.

ये देश बड़ी संख्या में लोगों के आने की आशंका से चिंतित हैं.इटली के मंत्री ने कहा कि अगर बड़ी संख्या में लोग भागकर यूरोप आते हैं तो सभी यूरोपीय देशों को मिलकर इन्हें शरण देनी चाहिए.

लेकिन कई अन्य देशों का कहना है कि अब तक काफ़ी कम आप्रवासी यूरोप आए हैं और लीबिया से तो बिल्कुल नहीं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि समस्या से निपटने के लिए इटली इससे कहीं ज़्यादा प्रतिबद्धता चाहता है. यही तनाव का मुख्य कारण है.

वैसे स्थिति बिगड़ने की सूरत में यूरोपीय संघ योजना तैयार कर रहा है. कई देशों ने कहा है कि आप्रवासियों और शरण लेने वालों से निपटने के लिए वो विशेषज्ञों की टीम भेजने को तैयार हैं.

'अंतरराष्ट्रीय जाँच हो'

वहीं वरिष्ठ फ़्रांसीसी कूटनयिक फ़्रांसवा ज़ाइमरे ने कहा है कि कर्नल गद्दाफ़ी के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय जांच शुरु करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं.

ये मानवाधिकार मामलों के लिए फ़्रांस के दूते हैं. उनका कहना है कि लीबिया में मारे गए लोगों की संख्या हज़ार से ज़्यादा हो सकती है.

इससे पहले कर्नल गद्दाफ़ी ने एक बार फिर अपने अवाम को संबोधित किया. कर्नल गद्दाफ़ी ने ताज़ा संबोधन में लीबिया में हुई हिंसा के लिए चरमपंथी समूह 'अल-क़ायदा' के नेता ओसामा बिन लादेन को दोषी ठहराया है.

गद्दाफ़ी ने कहा कि लीबिया में जो कुछ रहा है कि वो 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' है. उन्होंने अज्ञात लोगों पर युवाओं को मादक द्रव्य पदार्थ मुहैया करवाने का आरोप लगाया.

गद्दाफ़ी ने परिवारों से अपने बेटों को रोकने और घर से ना निकलने देने का आग्रह किया है.

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