कई देशों को ब्रिटेन की सहायता बंद

ऐंड्रू मिचैल
Image caption ब्रिटेन बहुत से देशों को सहायता देना बंद करेगा

ब्रिटेन दुनिया के 16 देशों को सहायता देना बंद करने वाला है और भारत की सहायता राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी.

इस सप्ताह सरकार के विदेशी सहायता बजट की समीक्षा प्रकाशित होने वाली है जिसकी प्रति बीबीसी को देखने को मिली.

हालांकि इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान संसद अंतरराष्ट्रीय विकास बजट में एक तिहाई वृद्धि करेगी.

अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री ऐंड्रू मिचैल ने कहा कि सहायता राशि को अधिक केंद्रीभूत ढंग से ख़र्च किया जाएगा.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सहायता ख़र्च ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए के अच्छा है.

अधिक पारदर्शिता

सरकार की इस रिपोर्ट में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की योजना का ख़ाका तैयार किया गया है जिसमें ऐसे कार्यक्रमों पर पैसा ख़र्च करने पर बल दिया गया है जिनसे ठोस परिणाम मिलने की संभावना हो.

रिपोर्ट ये भी कहती है कि 2014 तक ब्रिटेन की 30 प्रतिशत सहायता राशि युद्धरत और अस्थिर देशों को जाएगी.

ब्रिटेन से मिलने वाली सहायता राशि पाने वाले देशों में भारत इस समय सबसे आगे है लेकिन ब्रिटेन के प्रसार माध्यमों में इस बात पर सवाल उठाए गए हैं कि जिस देश की आर्थिक विकास दर 10 प्रतिशत के लगभग हो उसे ब्रिटिश सहायता की क्या ज़रूरत है.

लेकिन दूसरी तरफ़ ये तर्क दिया जाता है कि भारत की लगभग 50 करोड़ आबादी बेहद ग़रीब है और सहायता के बिना विश्व निर्धनता घटाने के प्रयास सफल नहीं हो सकते.

अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री ऐंड्रू मिचैल ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "सच्चाई ये है कि अगर हम 2015 तक अपने सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों तक पहुंचना चाहते हैं तो हमें वहां काम करना होगा जहां ग़रीबी अधिकतम है".

इस सप्ताहांत ऐसी ख़बरें थीं कि ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन को ये कहकर पैसा देना बंद करने की धमकी दी थी कि वह अपने कार्य व्यापार में सुधार लाए.

लेकिन अब लगता है कि विश्व खाद्य कार्यक्रम को और धन दिया जा सकता है जो दुनिया भर में आपात खाद्य सहायता पहुंचाने का काम करता है.

ब्रिटेन एक प्रमुख दाता देश है और संयुक्त राष्ट्र के किसी भी कार्यक्रम को मिलने वाली राशि में कटौती का गहरा प्रभाव पड़ सकता है.

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