फफूंद ने अफ़ीम की पैदावर आधी की

अफ़ग़ानिस्तान और आसपास के इलाक़ों में वर्ष 2009 के मुकाबले 2010 में अफ़ीम का उत्पादन लगभग आधा हो गया है.

ये उत्पादन गिरकर लगभग 3600 टन रह गया है और इसका मुख्य कारण फसल में फफूंद लगना है. ये तथ्य अंतरराष्ट्रीय नारकॉटिक्स कंट्रोल बोर्ड (आईएनसीबी) ने अपनी सालाना रिपोर्ट में जारी किए हैं.

अवैध रूप से होनी वाली अफ़ीम की पैदावर में भले ही कमी आई है. लेकिन आईएनसीबी के मुताबिक इसका ये मतलब ये नहीं लगाया जा सकता कि बाज़ार में हेरोइन की उपलब्धता में कमी आ जाएगी क्योंकि अफ़ीम की अच्छी ख़ासी खेप मौजूद है.

पिछले साल अफ़ग़ान अधिकारियों ने भी कहा था कि अफ़ीम की फ़सल में 48 प्रतिशत की कमी आई जिससे दाम चढ़ गए हैं.

दुनिया की 90 प्रतिशत अफ़ीम अफ़ग़ानिस्तान से आती है और तालिबान की आय का भी यही मुख्य स्रोत है. विश्व बाज़ार में अफ़ीम का क़रीब 65 अरब डॉलर का व्यापार होता है.

डिज़ाइनर ड्रग्स

अंतरराष्ट्रीय नारकॉटिक्स कंट्रोल बोर्ड (आईएनसीबी) ने ये चिंता भी जताई है कि डिज़ाइनर ड्रग्स का उत्पदान और बिक्री तेज़ी से हो रही है.

डिज़ाइनर ड्रग्स का निर्माण मादक पदार्थों के अणुओं में बदलाव करके किया जाता है. इस प्रक्रिया के कारण एक नया पदार्थ बन जाता है लेकिन उसका असर अन्य ड्रग्स के जैसे ही होता है.

आईएनसीबी के मुताबिक इस बदलाव की वजह से इन नए पदार्थों का नाम उन मादक पदार्थों की सूची में नहीं होता जिन पर प्रतिबंध लगा होता है.

दक्षिण एशिया की बात करें तो तस्करी करने वालों के लिए ये क्षेत्र अब सिंथेटिक मादक पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले रसायन हासिल करने का मुख्य गढ़ गया है.

भ्रष्टाचार ज़िम्मेदार

अंतरराष्ट्रीय नारकॉटिक्स कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि मादक पदार्थों की तस्करी के लिए भ्रष्टाचार काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार है. रिपोर्ट के अनुसार जिन अधिकारियों या संस्थाओं को तस्करी पर अंकुश लगाना होता है, वो ही भ्रष्ट होती हैं. इसमें कहा गया है कि अगर तस्करी रोकनी है तो भ्रष्टाचार से निपटना होगा.

रिपोर्ट में इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि विश्व की 80 फ़ीसदी आबाद को ज़रूरी दवाएँ उपलब्ध नहीं है, ख़ासकर एशिया और अफ़्रीका में.

अगर इलाक़ों की बात करें तो मेक्सिको से चलने वाले गुटों का अमरीका में कोकेन और हेरोइन के बाज़ार पर कब्ज़ा है.

चीन, मलेशिया, बर्मा, सिंगापुर और वियतनाम में सबसे ज़्यादा इस्तमाल होने वाला मादक पदार्थ हेरोइन है. हालांकि हेरोइन का सबके बड़ा बाज़ार उत्तरी यूरोप है- ब्रिटेन, इटली, फ्रांस और जर्मनी.

अंतरराष्ट्रीय नारकॉटिक्स कंट्रोल बोर्ड के आँकड़ों के अनुसार अफ़्रीका के ज़रिए यूरोप में कोकेन की तस्करी में फिर से बढ़ोत्तरी हो रही है. पिछले दो सालों से इलाक़े में कोकेन की तस्करी में गिरावट हुई थी.

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