शरणार्थियों की जान दांव पर: संयुक्त राष्ट्र

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Image caption अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने लीबिया में फंसे लोगों को निकालने की कोशिशें भी तेज़ कर दी हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि लीबिया में जारी हिंसा से बचने के लिए पलायन कर रहे हज़ारों शरणार्थी लीबिया-ट्यूनिशिया की सीमा पर फंसे हैं और उनकी जान को खतरा बढ़ता जा रहा है.

उन्होंने कहा कि हज़ारों की संख्या में मौजूद इन लोगों को जल्द से जल्द खाना, पानी और सिर पर छत मुहैया कराने की ज़रूरत है.

इस बीच लीबिया की सरकार को एक और झटका देते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आम सहमति से लीबिया को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से निलंबित कर दिया है.

संयुक्त राष्ट्र स्थित बीबीसी संवाददाता के मुताबिक लीबियाई नेता कर्नल गद्दाफ़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं.

‘गंभीर मानवीय संकट’

शरणार्थियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था का कहना है कि ट्यूनिशिया और लीबिया की सीमा पर लगातार बढ़ती शरणार्थियों की संख्या ने ‘गंभीर मानवीय संकट’ पैदा कर दिया है.

लीबिया से पलायन कर रहे लोग हज़ारों की संख्या में ट्यूनिशिया की सीमा पर मौजूद हैं और चारों तरफ आराजकाता का माहौल बना हुआ है.

शरणार्थियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था के मुताबिक ट्यूनिशिया के स्थानीय लोग अब इस संकट से निपटने में नाकाम हैं और शरणार्थियों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर अंतरराष्ट्रीय मदद की ज़रूरत है.

ट्यूनिशिया-लीबिया की सीमा पर तीन दिन से मौजूद एक बीबीसी संवाददाता के मुताबिक लीबिया की ओर से हज़ारों लोग लगातार इस उम्मीद में ट्यूनिशिया में दाखिल हो रहे हैं कि वो यहां से निकल पाएंगे.

'दम घुटने की स्थिति'

लोगों की भीड़ इतनी बढ़ गई है कि उनके पास खड़े होने और बैठने की जगह नहीं और लोगों को भीड़ में कुचले जाने का डर सता रहा है. कई लोग भीड़ में दम घुटने के कारण बेहद परेशान हैं.

शरणार्थियों के लिए काम करने वाली संस्था की प्रतिनिधी मेलिसा फ्लेमिंग के अनुसार, ''लीबिया में जारी संघर्ष के बाद 20 फरवरी से अब तक 70 से 75 हज़ार लोग ट्यूनिशिया में दाखिल हो चुके हैं और इतने ही लोग मिस्र पहुंचे. हालांकि वहां से वो आगे के लिए रवाना होने में कामयाब रहे. ''

उन्होंने बताया, '' ट्यूनिशिया-लीबिया में मौजूद संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों ने हमें बताया है कि इस सीमा पर गंभीर संकट की स्थिती पैदा हो गई है. ''

लगभग 2000 लोग हर घंटे ट्यूनिशिया पहुंच रहे हैं और इनमें से कई के पास आगे जाने का ज़रिया नहीं. इनमें से ज़्यादातर लोग मिस्र से हैं जबकि एक बड़ी संख्या चीनियों और बांग्लादेशियों की भी है. लगभग 20 हज़ार लीबिया की सीमा पर भी मौजूद हैं.

बेहाल हैं लोग

रेड क्रिसेंट संस्था के साथ काम करनेवाले चिकित्सक हुसैन सालाह ने इलाज के लिए आ रहे मरीज़ों के बारे में बताते हुए कहा, '' कुछ ऐसे लोग हैं जिनको गिरने की वजह से चोटें आई हैं, कुछ इस कारण बीमार हैं कि उनका दम लगभग घुट सा गया था. कुछ को बहुत ऊंची जगह से फेक दिया गया था. एक दो औरतें गर्भ से हैं.''

लीबिया से वतन वापस जा रहे मिस्र के एक नागरिक ने कहा कि मिस्र की हुकुमत ने वहां फंसे अपने नागरिकों के मदद की कोई व्यवस्था नहीं की है.

उन्होंने कहा, ''लीबिया के लोगों ने हमारे साथ बड़ा बुरा बर्ताव किया है. हमें दो दिनों से खाना नहीं नसीब हुआ है. ट्यूनिशिया पहुंचने पर हमें खाने के लिए दूध और ब्रेड दिया गया है.''

नई अड़चनें

इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की लीबिया के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई की योजना में नई अड़चनें पैदा हो रही हैं.

जहां एक ओर अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी किलंटन ने लीबिया के आसपास के इलाके को ‘उड़ान निषिद्ध क्षेत्र’ घोषित करने की बात कही है वहीं अमरीका की केंद्रीय कमान के मुखिया जनरल जेम्स मैटिस ने साफ किया है कि निषिद्ध क्षेत्र स्थापित करने के लिए लीबिया की वायु सेना के ठिकानों को ध्वस्त करना होगी.

उधर फ्रांस और इटली ने साफ़ तौर पर कहा है कि किसी भी तरह की सैनिक कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के बिना नहीं की जानी चाहिए. चीन और रूस भी ऐसे किसी भी क़दम का विरोध कर रहे हैं.

गद्दाफ़ी ने भेजी राहत

इस बीच लीबिया की सरकार ने कहा है कि वो देश के पूर्वी हिस्से में आम लोगों की सहायता के लिए राहत सामग्री भेज रही है.

गद्दाफ़ी के नियंत्रण वाली सरकार का कहना है कि हालांकि इस क्षेत्र का ज्यादातर इलाका सरकार विरोधी गुटों के नियंत्रण में है फिर भी वो आम लोगों की मदद के लिए सामान भेजेगी.

त्रिपोली में मौजूद बीबीसी के मध्यपूर्व के संवाददाता जेरेमी बोवेन को राजधानी के दक्षिण क्षेत्र में ले जाया गया और कंबल, भोजन और दवा जैसी ज़रूरी चीज़ों से लदे 18 ट्रक दिखाए गए.

हमले का डर

इससे पहले ज़ाविया शहर से विरोध की खबरें आ रहीं थी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सरकार समर्थक नागरिक सेना ने शहर में कई जगहों पर हमले किए लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया.

सरकार राजधानी त्रिपोली में ज़्यादा से ज़्यादा इलाके को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रही है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार लोगों में सत्ताधारियों को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा साथ ही उन्हें इस बात का डर भी है कि सरकार के समर्थक फिर हमला न कर दें.

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