मालिकों के ख़िलाफ़ मुक़दमा हो सकेगा

दक्षिण अफ़्रीक़ा गोल्ड माइन
Image caption दक्षिण अफ़्रीक़ा में सोने की खदानों में काम करने वालो लाखों मज़दूर ना जाने कितनी तरह की बीमारियों के शिकार बनते हैं.

दक्षिण अफ़्रीक़ा की उच्चतम अदालत ने कहा है कि फेफड़े की बीमारी के शिकार खदान मज़दूर खदान के मालिकों के ख़िलाफ़ मुक़दमा कर सकते हैं.एक अनुमान के मुताबिक़ पूरे दक्षिण अफ़्रीक़ा में सोने की खदानों में काम करने वाले लगभग दो लाख 80 हज़ार मजदूर फेफड़े की बीमारी के शिकार हैं.

मज़दूरों को ये बीमारी खदान में मौजूद धूल से होती है.

बीबीसी के अफ़्रीक़ा संपादक मार्टिन प्लॉट के अनुसार उच्चतम न्यायालय के इस फ़ैसले से खदान मालिकों के ख़िलाफ़ मुक़दमेबाज़ी का एक नया दौर शुरु हो जाएगा.

अदालत में जिस मज़दूर ने याचिका दायर की थी वो तो अदालत का फै़सला आने से पहले ही इस दुनिया से चल बसा लेकिन उसकी कंपनी एंगलोगोल्ड अशांति का मानना है कि अदालत के इस फ़ैसले के बाद दूसरे मज़दूरों को अपनी बीमारियों के लिए हर्जाना मांगने का मौक़ा मिलेगा.

याचिकाकर्ता के वकील रिचर्ड स्पूर ने बीबीसी को बताया कि इस फ़ैसले के बाद खनन कंपनियां अब मज़दूरों के साथ मशीन की तरह बर्ताव नहीं कर सकेंगी जिसे इस्तेमाल करने के बाद छोड़ दिया जाता है.

इस तरह की अटकलें लगाई जा रही है कि उच्चतम न्यायालय के इस फ़ैसले के बाद ज़मीन के बहुत अंदर गहराई में खनन का काम रुक जाएगा लेकिन खनन कंपनियों का मानना है कि ऐसा नहीं होगा.

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