ईनाम में दाह संस्कार का ख़र्चा !

Image caption विजेता को ईनाम के तौर पर अपने दाह संस्कार का ख़र्च मिलेगा.

जर्मन रेडियों ने एक अनोखी प्रतियोगिता का आयोजन किया है जिसमें लोगों से कहा गया है कि वो बताएं कि उनकी क़ब्र पर लगे पत्थर पर क्या लिखा हो.

इस प्रतियोगिता के विजेता को ईनाम के तौर पर अपने अंतिम संस्कार पर होने वाले खर्च की राशि का चेक मिलेगा.

दिलचस्प बात ये है कि इस प्रतियोगिता में 600 लोगों ने भाग लिया है और विजेता के नाम की घोषणा बुधवार को की जाएगी.

वहीं अंतिम संस्कार करवाने वालों के संगठन ने इस प्रतियोगिता को बेतुका बताया है और रेडियो गैलेक्सी पर क़ाऩूनी मुक़दमा भी दायर किया है.

रेडियो स्टेशन के एक प्रस्तुतकर्ता येन्स फ़्लूगर ने इस प्रतियोगिता का बचाव करते हुए कहा है कि मौत जैसे विषय पर लोग बात करने से कतराते हैं. इसलिए हम चाहते हैं कि युवा पीढ़ी इस विषय पर चर्चा करे.

येन्स फ़्लूगर कहते हैं “हम नौजवानों के बीच मौत जैसे मुश्किल विषय पर जागरूकता बढ़ाना चाहते हैं.”

इस रेडियो स्टेशन के अधिकतर श्रोता युवा वर्ग के हैं.

इस प्रतियोगिता में तीन हज़ार यूरो का ईनाम है लेकिन इस राशि को मौत के बीमे पर ही ख़र्च किया जा सकता है जिससे अंतिम संस्कार का ख़र्च उठाया जा सके.

दाह संस्कार करवाने वालों के संगठन ने इस प्रतियोगिता के विरोध में अपनी वेबसाईट पर लिखा है, “ये प्रतियोगिता न केवल धर्मविरोधी और अरुचिपूर्ण है बल्कि अनैतिक है और क़ानू़न के भी खिलाफ़ है.”

इस प्रतियोगिता के खिलाफ़ दायर किए गए मुक़दमे का फ़ैसला 17 मार्च को आएगा, लेकिन तबतक इस प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा हो चुकी होगी.

रेडियो प्रस्तुतकर्ता येन्स फ़्लूगर कहते हैं कि हम चाहते है कि लोग अपने समाधि लेख हमें भेजें, वो किसी और की लिखी पंक्तियां भी भेज सकते हैं, लेकिन मेरे विचार में वो सृजनात्मक नहीं कही जाएंगी.

येन्स फ़्लूगर कहते हैं कि कुछ समाधि लेख आमोदपूर्ण भी हो सकते हैं लेकिन लोगों को अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता है.

विंस्टन चर्चिल ने अपनी समाधि के लिए लिखा था, “मैं अपने निर्माता से मिलने के लिए तैयार हूँ, हालांकि मुझे बनाने वाला मुझसे मिलने के संघर्षपूर्ण काम के लिए तैयार है या नहीं ये और बात है.”

वहीं कॉमेडियन स्पाइक मिलीगन की क़ब्र पर लिखा हैं, “मैने कहा था ना, मैं बीमार हूँ.”

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