रास लानुफ़ पर गद्दाफ़ी का कब्ज़ा, ओबामा 'सैन्य विकल्प' पर बोले

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Image caption रास लानुफ़ पर कब्ज़ा करने के बाद त्रिपोली में कर्नल गद्दाफ़ी की समर्थक महिलाओं का जश्न

लीबिया में सरकार के विरोधियों और कर्नल गद्दाफ़ी की सेना के बीच भीषण संघर्ष हुआ है. इस बीच अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि वहाँ हो रही हिंसा के बारे में नैटो की सेनाएं सैन्य कार्रवाई समेत कई विकल्पों पर विचार कर रही हैं.

लीबिया में तेल उत्पादन का प्रमुख शहर रास लानुफ़ विद्रोहियों के नियंत्रण से बाहर हो गया है. वहाँ एक दिन की भीषण ज़मीनी और हवाई जंग के बाद कर्नल गद्दाफ़ी के समर्थक सैनिकों ने कब्ज़ा कर लिया है.

सरकार विरोधी लड़ाके त्रिपोली की बढ़ते हुए रास लानुफ़ में एकत्र हुए थे जिसके बाद सरकारी सेना के लड़ाकू विमानों ने शहर पर भीषण बमबारी की थी.

रिपोर्टों के अनुसार दो बच्चों समेत 20 लोग मारे गए हैं और 90 घायल हुए हैं. कर्नल गद्दाफ़ी की फ़ौज ने त्रिपोली के नज़दीक ज़ाविया शहर पर तोप के गोले दागे हैं. कुछ दिन पहले राजधानी त्रिपोली से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित इस शहर पर सरकार के विरोधियों का कब्ज़ा हो गया था.

मिस्र और ट्यूनिशिया में पिछले महीने सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद, लीबिया के अनेक शहरों में प्रदर्शन शुरु हो गए थे. फिर इन प्रदर्शनों ने सरकार विरोधी लड़ाकों और सत्तापक्ष के सैनिकों-समर्थकों के बीच हिंसक संघर्ष का रूप ले लिया.

कर्नल गद्दाफ़ी पिछले लगभघ 42 साल से सत्ता में बने हुए हैं. उनके विरोधी उनके सत्ता छोड़ देने और व्यापक राजनीतिक सुधारों के शुरु करने के लिए प्रदर्शन और अब हिंसक संघर्ष कर रहे हैं.

कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव: नैटो

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है, "ब्रसेल्स में नैटो कई विकल्पों पर चर्चा कर रहा है जिसमें संभावित सैन्य कार्रवाई का विकल्प शामिल है. ये लीबिया में जारी हिंसा के जवाब में किया जा रहा है."

उनका कहना था, "हम लीबिया की जनता को स्पष्ट संदेश देते हैं कि इस अनचाही हिंसा के सामने हम उनके साथ खड़े होंगे. हम लोकतांत्रिक आदर्शों के जवाब में दमनचक्र देख रहे हैं."

लेकिन रूस का कहना है कि वह सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़ है.

उधर नैटो के महासचिव एंडर्स फ़ॉग रासमुसेन ने कहा है कि नैटो समझादारी से योजना बनाने में जुटा है. लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा किसी भी कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव की ज़रूरत होगी.

दूसरी ओर ब्रिटेन ने इस बात की पुष्टि की है कि वह सुरक्षा परिषद में सहयोगियों के साथ 'नो फ़्लाई ज़ोन' के प्रस्ताव पर काम कर रहा है.

इससे पहले ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग स्पष्ट कर चुके हैं कि ऐसे किसी भी कदम के लिए क्षेत्रीय समर्थन और क़ानूनी आधार की ज़रूरत है.

'विद्रोहियों को सशस्त्र करना'

वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता किम घट्टास के अनुसार, " राष्ट्रपति ओबामा ने सैन्य कार्रवाई के विकल्प के बारे में बात करते हुए दो बार संभावित शब्द का इस्तेमाल किया. स्पष्ट है अमरीका नो फ़्लाई ज़ोन के ज़्यादा पक्ष में नहीं है. लेकिन अब इसकी ख़ासी चर्चा हो रही है और यदि अंतरराष्ट्रीय सर्वसम्मति बनती है और सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव पारित होता है तो अमरीका ऐसा करेगा. राष्ट्रपति के कार्यालय ने साफ़ किया है लीबिया में विद्रोहियों को सशस्त्र करने समेत सभी विकल्प खुले हैं."

लेकिन फ़िलहाल अमरीकी सेना और नैटो लीबिया की सीमा पर मानवीय सहायता बढ़ाने के लिए कमर कर रहा है और उसके हवाई क्षेत्र पर नज़र रखने के बारे में भी कदम उठा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विद्रोह के तीन हफ़्तों में लगभग दो लाख लोग लीबिया से पलायन कर चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने जॉर्डन के पूर्व विदेश मंत्री अबदेलिलाह अल-ख़ातिब को लीबिया में अपना विशेष दूत नियुक्त किया है.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है, "लीबिया में आम लोग हिंसा का निशाना बन रहे हैं और हम सरकार से तुरंत बल प्रयोग रोकने और असैनिक लक्ष्यों पर हमला ना करने की मांग करते हैं."

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