लीबिया: विद्रोहियों पर टैंकों, तोपों से हमले

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अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि लीबिया के संदर्भ में नो फ़्लाई ज़ोन पर फ़ैसला अमरीका को नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र को ही लेना चाहिए.

उनका कहना है कि ये महत्वपूर्ण है कि यदि ऐसा होना है तो ये क़दम लीबियाई लोगों की ओर से, अंतरराष्ट्रीय समर्थन के साथ लिया गया फ़ैसला हो. हिलेरी ने कहा कि ये अमरीका के नेतृत्व में लिया गया फ़ैसला नहीं होना चाहिए.

अमरीकी विदेश मंत्री ने दोहराया कि शांतिपूर्ण तरीके से कर्नल गद्दाफ़ी सत्ता छोड़ें लेकिन उन्होंने चेतावनी भी कि लीबियाई संकट लंबा चल सकता है.

लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी का समर्थन कर रही फ़ौज ने ज़ाविया, रास लानुफ़ और सरकार के विरोधियों के अन्य अड्डों पर टैंकों, तोपों और लड़ाकू विमानों से हमले किए हैं.

राजधानी त्रिपोली से 50 किलोमीटर दूर स्थित ज़ाविया में मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी को इन हमलों का ब्योरा दिया है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार पिछले तीन हफ़्तों से चल रही हिंसा के कारण लीबिया में कम से कम 1000 लोग मारे गए हैं और दो लाख वहाँ से पलायन कर रहे हैं.

मिस्र और ट्यूनिशिया में पिछले महीने सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद, लीबिया के अनेक शहरों में प्रदर्शन शुरु हो गए थे. फिर इन प्रदर्शनों ने सरकार विरोधी लड़ाकों और सत्तापक्ष के सैनिकों-समर्थकों के बीच हिंसक संघर्ष का रूप ले लिया.

कर्नल गद्दाफ़ी पिछले लगभघ 41 साल से सत्ता में बने हुए हैं. उनके विरोधी उनके सत्ता छोड़ देने और व्यापक राजनीतिक सुधारों के शुरु करने के लिए प्रदर्शन और अब हिंसक संघर्ष कर रहे हैं.

'पचास टैंक, 120 बख़्तरबंद ट्रक'

ज़ाविया में मौजूद प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी को बताया कि मंगलवार सुबह से गद्दाफ़ी समर्थक फ़ौज 50 टैंकों, 120 बख़्तरबंद ट्रकों और ख़ासी संख्या में सैनिकों के इस्तेमाल से हमला कर रही है. उसके अनुसार ज़ाविया को जलाकर राख कर दिया गया है और बच्चों समेत अनेक लोग मारे गए हैं.

इस प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार सोमवार को भी फ़ौज ने तीन हमले किए थे लेकिन विद्रोहियों ने इन हमलों के नाकाम कर दिया है. उनके अनुसार स्पष्ट नहीं है कि फ़िलहाल ज़ाविया पर किसका कब्ज़ा है.

उधर रास लानुफ़ में गद्दाफ़ी समर्थक फ़ौज ने शहर पर भीषण बमबारी की है और लड़ाकू विमानों ने कम से कम चार बम गिराए हैं.

लीबिया की सरकार का कहना है कि उसकी फ़ौज ने आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया है और ज़ाविया के आसपास केवल तैनाती की गई है. लेकिन एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सरकार के दावे की पुष्टि करना संभव नहीं क्योंकि स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को शहर में जाने की इजाज़त नहीं है.

लेकिन लीबियाई मंत्रिमंडल में एक सलाहकार यूसुफ़ शाकिर ने बीबीसी को बताया, "लीबियाई सेना ने पहली बार फ़ैसला किया है कि शहरों से विद्रोहियों का सफ़ाया किया जाए. सेना ने पश्चिमी लीबिया में स्थित शहरों से शुरुआत की है और फिर वह बेनग़ाज़ी की ओर कुच करेगी."

नो फ़्लाई ज़ोन पर प्रयास तेज़

सरकार के विरोधियों ने कहा है कि उन्होंने अधिकारियों की उस पेशकश को ठुकरा दिया है जिसके तहत वे लीबिया के नेता कर्नल गद्दाफ़ी को सुरक्षित तरीके से सत्ता से बाहर जाने देने पर बातचीत करना चाहते थे.

लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार लीबियाई विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता का कहना था कि कर्नल गद्दाफ़ी के सत्ता छोड़ने की पेशकश 'पूरी तरह बकवास' है.

शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त एंटोनियो गुत्तेरेस का कहना है कि ट्यूनिशिया-लीबिया सीमा पर अब स्थिति नियंत्रण में है. जब से लीबिया में विद्रोह शुरु हुआ है तब से वहाँ लगभग 1.1 लाख मज़दूर और शरणार्थी पहुँचे हैं.

पश्चिमी देशों ने लीबिया पर नो फ़्लाई ज़ोन बनाने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं.

ब्रिटेन और फ़्रांस इस मक़सद से संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं. नैटो के रक्षा मंत्री गुरुवार को इस पर विचार करेंगे.

ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कॉन्फ़्रेंस ने भी नो फ़्लाई ज़ोन की मांग का समर्थन किया है. खाड़ी देशों ने भी इसका समर्थन किया है और आम नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा के इस्तेमाल की निंदा की है.

अरब लीग के एक अधिकारी ने कहा है कि शनिवार को काहिरा में उसके विदेश मंत्री लीबियाई संकट पर बहस करेंगे.

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