‘लीबिया में विद्रोहियों की जीत मुश्किल’

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राष्ट्रपति ओबामा भले ही कह चुके हों कि कर्नल ग़द्दाफ़ी को सत्ता से हटना चाहिए लेकिन उनके ख़ुफ़िया सलाहकार की राय कुछ अलग है.

अमरीका के सबसे वरिष्ठ ख़ुफ़िया अधिकारी का आकलन है कि लीबिया में विद्रोहियों की जीत मुश्किल है.

राष्ट्रपति बराक ओबामा के ख़ुफ़िया सलाहकार जनरल जेम्स क्लैपर ने कहा है कि आख़िर में कर्नल मुअम्मार ग़द्दाफ़ी ही जीतेंगे क्योंकि उनके सैनिक ज़्यादा अच्छी तरह प्रशिक्षित हैं और उनके पास बेहतर हथियार हैं.

इस बीच फ़्रांस ने लीबिया में विपक्षी गुटों को मान्यता दे दी है, पर नेटो देशों में लीबिया पर हमला करने को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है.

जनरल जेम्स क्लैपर का मानना है कि लीबिया के शासक सत्ता में बने रहने की जंग जीतने में शायद कामयाब रहेंगे.

बंटने की संभावना

जेम्स क्लैपर ने लीबिया के तीन अर्ध-स्वायत्त लघु राज्यों में बंट जाने की भी संभावना जताई.

हालांकि उन्होंने लीबिया के आकाश को ‘उड़ान-निषिद्ध क्षेत्र’ घोषित करने संबंधी सवालों का कोई जवाब नहीं दिया.

एक अन्य संसदीय समिति के सामने विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि लीबिया के संबंध में हर संभव विकल्प पर सोच विचार किया गया है लेकिन अगर ये विकल्प आसान होते तो हम अब तक उन्हें लागू कर चुके होते.

उधर नेटो में इस सवाल पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि लीबिया के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई की जाए.

नेटो के महासचिव एन्द्रेस फ़ॉग़ रासमुसैन ने कहा है कि लीबिया में उड़ान-निषिद्ध क्षेत्र तभी घोषित किया जा सकता है जब संयुक्त राष्ट्र बहुत स्पष्ट रूप से इसकी इजाज़त दे.

उन्होंने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मौजूदा प्रस्ताव हथियारबंद सैन्य बलों के इस्तेमाल की इजाज़त नहीं देता. लेकिन मैं इसकी कल्पना नहीं कर सकता कि अगर कर्नल ग़द्दाफ़ी सुनियोजित तरीक़े से अपने लोगों पर हमला करते रहे तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमरीका हाथ पर हाथ धरे देखता रहेगा. लेकिन मुझे कहना पड़ेगा कि हम लीबिया में दख़ल नहीं देंगे और किसी भी कार्रवाई के लिए स्पष्ट क़ानूनी आधार तलाशने होंगे.''

विपक्षी गुटों को मान्यता

इस बीच मध्य-भूमध्य सागर में कई और युद्धपोत तैनात किए जा रहे हैं ताकि लीबिया को हथियारों की सप्लाई पर लगे प्रतिबंध को कड़ाई से लागू किया जा सके.

इस बीच कर्नल ग़द्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी ने स्पष्ट रुप से कहा है कि वो झुकने वाले नहीं हैं.

सैफ़ अल-इस्लाम ने कहा, ''ये हमारा देश है. हम कभी नहीं झुकेंगे और न कभी आत्मसमर्पण करेंगे. हम यहीं लीबिया में लड़ेंगे और यहीं मर जाएँगे. लीबिया की जनता कभी भी नेटो का स्वागत नहीं करेगी. हम कभी भी अमरीका का यहाँ स्वागत नहीं करेंगे. लीबिया कोई केक का टुकड़ा नहीं है. हम मिकी माउस नहीं हैं.''

इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने कहा है कि लीबिया के लोगों की दुर्दशा समाप्त करने के लिए मुअम्मार ग़द्दाफ़ी और उनके समर्थकों को स्त्ता छोड़ देनी चाहिए.

इससे पहले फ़्रांस ने लीबिया के विपक्षी गुटों को मान्यता दी दे थी, लेकिन ब्रिटेन के विदेशमंत्री विलियम हेग ने कहा है कि मान्यता देशों को दी जाती है गुटों को नहीं. फिर भी विपक्षी गुटों के नेताओं से बातचीत की जा सकती है.

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