अफ़्रीकी संघ सैन्य हस्तक्षेप के ख़िलाफ़

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कर्नल गद्दाफ़ी के सैनिकों ने लीबिया में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ कई इलाक़ों में बड़ी जीत हासिल की है और उन्हें दो इलाक़े से पीछे धकेल दिया है.वहीं अफ़्रीकी संघ ने लीबिया में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध किया है.

अफ़्रीकी संघ में शांति और सुरक्षा मामलों के आयुक्त ने कहा है कि सैन्य कार्रवाई के बजाए दोनों खेमों के बीच बातचीत का माहौल तैयार करने की कोशिश करनी चाहिए.उनका कहना था कि अफ़्रीकी देशों की ओर से ठोस क़दमों की ज़रूरत है.

उधर त्रिपोली के पास ज़ाविया से पश्चिमी पत्रकारों ने इन दावों की पुष्टि की है कि कई दिनों की बमबारी के बाद ज़ाविया गद्दाफ़ी के नियंत्रण में चला गया है और विद्रोही रास लानुफ़ से भी भाग गए हैं.

रिपोर्टों के मुताबिक ट्रकों और कारों में सवार हज़ारों विद्रोही पूर्व की ओर भाग रहे हैं.बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं कि गद्दाफ़ी के सैनिकों को सफलता मिल रही है.

'जीत मुश्किल'

गद्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल इस्लाम ने एक रैली में आगाह किया है कि बेनगाज़ी में भी सैनिक धावा बोलने को तैयार हैं.उन्होंने कहा है कि पश्चिमी देश, अरब लीग और अन्य आलोचकों की लीबिया को कोई परवाह नहीं है.

लेकिन लीबिया में विपक्ष के नेता के तौर पर उभरे मुस्तफ़ा अब्दुल जलील ने आक्रामक रुख़ अपनाया हुआ है.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि वे फ़्रांस की तरह बेनगाज़ी में विद्रोही शासन को मान्यता दें.

वहीं रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति ने कह दिया है कि लीबिया में गृह युद्ध जैसी स्थिति है.

उधर अमरीका के सबसे वरिष्ठ ख़ुफ़िया अधिकारी का आकलन है कि लीबिया में विद्रोहियों की जीत मुश्किल है.

राष्ट्रपति बराक ओबामा के ख़ुफ़िया सलाहकार जनरल जेम्स क्लैपर ने कहा है कि आख़िर में कर्नल मुअम्मार ग़द्दाफ़ी ही जीतेंगे क्योंकि उनके सैनिक ज़्यादा अच्छी तरह प्रशिक्षित हैं और उनके पास बेहतर हथियार हैं.

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