जापान: अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान

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जापान के अधिकतर हिस्से शुक्रवार को आए भीषण भूकंप और इसके बाद सुनामी से हुई तबाही की चपेट में हैं लेकिन सबसे अधिक तबाही उत्तरी तट पर बसे इलाकों में हुई है.

सुनामी की अब भी बनी हुई आशंका के मद्देनज़र जापान में कई कंपनियों ने उत्पादन रोक दिया है.सोनी, टॉयोटा, निसान और होंडा उन कंपनियों में से हैं जो अपने संयंत्र बंद करने जा रहे हैं.

जानकारों के मुताबिक यह कहना जल्‍दबाज़ी होगी कि क़ुदरत के इस क़हर का भविष्‍य में जापान पर क्‍या असर होगा लेकिन इतनी बड़ी त्रासदी ने जापान सहित पूरी दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था को हिला दिया है.

भूकंप के बाद एशियाई शेयर बाज़ारों में गिरावट देखने को मिली जबकि जापान के निक्की में कामकाज जारी रहा.

यूरोपीय शेयर बाज़ारों में पिछले तीन महीने के दौरान सबसे अधिक गिरावट देखी गई.

क़रीब 8.9 की तीव्रता वाले भूकंप और दस मीटर ऊंची सुनामी ने जापान के कई बंदरगाहों, बिजली संयंत्रों और रिफ़ाइनरियों को बंद कर दिया है.

कितना नुकसान

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लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि आपदा ऐसे समय आई है जबकि जापानी अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है, क्योंकि पिछले साल के अंत में ये ख़ुद ही बहुत कमज़ोर थी.

जानकारों का ये भी कहना है कि दूसरे देशों की तुलना में जापान ने इस तरह की आपदा से निपटने की तैयारी ज़्यादा बेहतर तरीक़े से कर रखी है.

सिंगापुर स्थित आर्थिक विशेषज्ञ डेविड कोहेन का कहना है, “जो भी नुकसान हुआ है वह देश के सकल घरेलू उत्पाद के क़रीब एक प्रतिशत के बराबर हो सकता है.”

वे इसकी तुलना 2004 में आए निगाटा भूकंप से करते हुए कहते हैं कि उस वक़्त भी जीडीपी के क़रीब 0.4 प्रतिशत के बराबर नुकसान हुआ था लेकिन छह महीने के भीतर ही एक प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई थी.

शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक राजधानी टोक्यो, जो कि देश का आर्थिक केंद्र भी है, उसे भूकंप से ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ है.

लेकिन जिन इलाकों में सुनामी का कहर बरपा है वहां बड़े पैमाने पर चावल का उत्‍पादन होता है.

जानकारों का कहना है कि मियागी प्रांत में अधिकतर लोगों की रोज़ी-रोटी का सहारा मछली का कारोबार है और इस कारोबार को फिर से खड़ा करना एक चुनौती होगी.

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