जापान: 1700 मरे, हज़ारों अभी भी हैं लापता

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जापान में भूकंप और सुनामी के दो दिनों के बाद भी उत्तर-पूर्वी तट के कई छोटे समुदाय देश से कटे हुए हैं. कई इलाकों पर लोग छतों पर अटके हुए हैं और सेना हेलीकॉप्टरों की मदद से उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है.

रेड क्रॉस के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि आशंका इस बात की है कि हज़ार से कहीं ज़्यादा लोग इसमें मारे जा चुके हैं.

उत्तर-पूर्वी जापान में आधिकारिक तौर पर 1700 लोगों को मृत या लापता घोषित कर दिया गया है.

मरने वालों में ज़्यादातर वो लोग हैं जिन्हें सुनामी की लहरें बहाकर ले गईं. कई गाँव तो पूरे के पूरे बह गए.

बंदरगाह के पास बसे मिनामीसानरिकू कस्बे में 10 हज़ार लोगों के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है.

25 हज़ार से ज़्यादा की आबादी वाले रिकुज़ेनतकाडा कस्बा लगभग पूरी तरह तबाह हो गया है. वहाँ से 400 शव बरामद हुए हैं.

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Image caption बीबीसी संवाददाता का कहना है कि तबाही दिल दहलाने वाली है.

लोगों की मदद के लिए बड़े पैमाने पर राहत कार्य चल रहा है. दो लाख से ज़्यादा लोग शिविरों में हैं.

सेंदाई पहुंचे एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि वहां की तबाही दिल दहलाने वाली है.

बंदरगाह के पास कई हिस्सों में अभी भी आग लगी हुई है.

राहत और बचाव

राहत और बचाव कार्य में हज़ारों जापानी सैनिकों, जहाज़ों और विमानों को लगाया गया है. 50 से ज़्यादा देशों ने मदद की पेशकश की है.

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने कहा है कि नौ लोगों का विशेषज्ञ दल भेजा जा रहा है जिसमें कई लोग जापानी भाषा बोलते हैं. वहीं जापान के अनुरोध के बाद ब्रिटेन भी अपना दल भेज रहा है.स्विट्ज़रलैंड. ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और अमरीका की टीमें जापान रवाना हो चुकी हैं.

शुक्रवार को जापान में ज़बरदस्त भूकंप आया था जिसका तीव्रता 8.9 मापी गई थी.

भूकंप के बाद सुनामी की ज़बरदस्त लहरें उठी थीं जिस वजह से काफ़ी तबाही हुई है. ये लहरें तट के दस किलोमीटर अंदर तक मार कर गईं थीं.

ये जापान के इतिहास में सबसे शक्तिशाली भूकंप में से एक है.

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आशंका जताई गई है कि मलबे के नीचे और लोग दबे हो सकते हैं. कई इलाके हैं जो बुरी तरह प्रभावित हुए हैं लेकिन वहाँ तक सड़क मार्च से नहीं पहुँचा जा सकता.

पुलिस का कहना है कि करीब दो लाख 15 हज़ार लोग अपना घर छोड़कर भाग गए हैं.

शुक्रवार को आए भूकंप के बाद करीब 50 बार दोबारा और झटके महसूस किए जा चुके हैं. इनमें से कई झटकों की तीव्रता छह से ज़्यादा थी.

टोक्यो में कई लोगों ने रात अपने अपने दफ़तरों में ही बिताई क्योंकि लिफ़्टें काम नहीं कर रही थीं.

बहुत लोगों को अपने घर पैदल चलकर जाना पड़ा क्योंकि ट्रेन सेवा बंद कर दी गई थी हालांकि अब वो चालू हो गई है.

उत्तरी जापान में लाखों लोग अभी भी बिना बिजली या पानी के हैं.

रेड क्रॉस संस्था का कहना है कि सुनामी चेतावनी प्रणाली की वजह से लाखों लोगों को दानवाकार लहरों के आने से पहले ही सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा सका.

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