जापान: संयंत्र से रिसाव का ख़तरा बढ़ा

इमेज कॉपीरइट Reuters

जापान के फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र के तीसरे रिएक्टर में धमाके बाद तापमान को नियंत्रित करने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं लेकिन संयंत्र से रिसाव का ख़तरा भी बढ़ गया है.

तकनीकी विशेषज्ञ लगातार इस संयंत्र में समुद्र का पानी डाल रहे हैं ताकि ईंधन के आसपास पैदा हो रही गर्मी को कम किया जा सके.

भूकंप और सूनामी के बाद शुक्रवार से संयंत्र को सुरक्षित बनाने में जुटे तकनीक विशेषज्ञों का कहना है कि संयंत्र में ताप को नियंत्रण में रखने वाली तकनीक फेल हो गई है. ऐसी स्थिति में रिसाव हो सकता है और इसे लेकर सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिए गए हैं.

शनिवार को भी इसी परमाणु संयंत्र के एक रिएक्टर में धमाका हुआ था. जापान के एक अधिकारी यूकियो एडानो ने बताया कि रिएक्टर के धमाके को रोकने की काफ़ी कोशिश की गई थी.

'अंदरूनी दीवार सुरक्षित'

बचावकार्यों में जुटे अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि संयंत्र की अंदरूनी और बुनियादी दीवार फिलहाल सुरक्षित है.

इससे पहले रिएक्टर-1 में हुए धमाके का कारण भी बढ़ती गर्मी और तापमान था.

माना जा रहा है कि दूसरा धमाका राहत कार्यों के दौरान रिएक्टर में भारी मात्रा में हाईड्रोजन गैस के जमा होने के चलते हुआ.

धमाके में 11 लोगों के घायल होने की खबर है जिनमें से एक की स्थिति गंभीर है.

हालांकि बचावकार्यों में जुटी अमरीकी सेना का कहना है कि उनके एक हवाई जहाज़ को मिले हलके विकिरण के संकेत के बाद सेना को इस इलाके से हटा दिया गया है.

इस बीच उनकी कोशिश है तीनों संयंत्रों में पैदा हुए ताप को जल्द से जल्द कम करना और धमाकों को टालना.

'रिसाव शुरु हो गया था'

इसके पहले शनिवार को इस परमाणु संयंत्र में धमाका हुआ था और रिसाव शुरु हो गया था.

इस धमाके के बाद परमाणु संयंत्र के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले हज़ारों लोगों को इलाक़ा खाली करने के लिए कहा गया था.

उल्लेखनीय है कि टोक्यो के उत्तर पूर्व में स्थित फुकुशिमा शहर में शुक्रवार को आए भूकंप में परमाणु संयंत्र को ख़ासा नुकसान पहुंचा था.

इसके बाद से ही बड़ी संख्या में इंजीनियर और अन्य कर्म

चारी समुद्र से पानी परमाणु संयंत्र पर डाल रहे थे ताकि उसका तापमान कम किया जा सके और संयंत्र को और नुक़सान से बचाया जा सके.

संयंत्र के आपरेटरों का कहना था कि एक समय संयंत्र के आसपास विकिरणों का स्तर वैध सीमा से अधिक चला गया था.

शनिवार को रिएक्टर की एक इमारत की छत ज़बर्दस्त विस्फोट के कारण उड़ गई थी.

नई बहस

इस बीच जापान में पैदा हुए परमाणु संकट को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु ऊर्जा को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं और परमाणु ऊर्जा को लेकर नई बहस छिड़ गई है.

स्विटज़रलैंड ने सुरक्षा इंतज़ामों के पुख़्ता होने तक नए परमाणु संयंत्र का काम टाल दिया है.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी संसद को संबोधित करते हुए कहा है कि सुनामी और भूकंप के खतरों को देखते हुए भारत के सभी परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा जांच की जाएगी.

रविवार को जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा था कि जापान का संकट पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर मोड़ है

उनका कहना था कि जर्मनी के परमाणु संयंत्रों के

सुरक्षा मापदंडों की समीक्षा की जाएगी.

एंगेला ने यह बात ऐसे समय में कही जब एक दिन पहले हज़ारों की संख्या में लोगों ने जर्मनी के परमाणु संयंत्रों को और लंबे समय तक चलाने की सरकार की योजना का विरोध किया था.

उधर अमरीका में सीनेटर जो लिबरमैन ने कहा है कि अमरीका को जापान में हुई घटनाओं से सबक लेना चाहिए और तब तक परमाणु संयंत्रों के विकास का काम रोकना चाहिए जब तक जापान से सभी सबक न ले लिए जाएं.

परमाणु ऊर्जा का विरोध करने वालों का कहना है कि यह प्रौद्योगिकी ख़तरनाक है और इस पर काबू करना अत्यंत मुश्किल है.

'सबसे बड़ी आपदा'

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption जापान से परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है

प्रधानमंत्री नाओतो कान ने इस भूकंप और सुनामी को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान की सबसे बड़ी आपदा करार देते हुए कहा कि लोग एकजुट हों और पुनर्निर्माण में लग जाएं.

जापान में अब भी भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं.

इसके पहले सोमवार को जापान के तटीय इलाक़ों में नई सुनामी का ख़तरे की आशंका की चेतावनी जारी कर दी गई थी जिसे मौसम विभाग ने बाद में वापस ले लिया.

हालांकि चेतावनी वापस ले ली गई है फिर भी जापान के तटीय इलाक़ों में रहने वाले लोगों से अपने घरों को छोड़कर ऊंचे स्थानों पर चले जाने को कहा गया है.

जापान में सरकार ने एक लाख सैनिकों को राहत और बचाव कार्य में लगाया है.

अब भी जापान के उत्तर पूर्वी इलाक़े के कई समुदायों के लोगों से संपर्क कटा हुआ है.

मरने वालों में ज़्यादातर वो लोग हैं जिन्हें सुनामी की लहरें बहाकर ले गईं. कई गाँव तो पूरे के पूरे बह गए.

शुक्रवार को जापान में ज़बरदस्त भूकंप आया था इसके बाद सुनामी की ज़बरदस्त लहरें उठी थीं जिस वजह से काफ़ी तबाही हुई है.

ये जापान के इतिहास में सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है.

संबंधित समाचार