क्या मक़सद है लीबिया के ख़िलाफ़ अभियान का...

गद्दाफ़ी इमेज कॉपीरइट 1
Image caption शुरुआत फ़्रांसीसी लड़ाकू विमान हमलों से हुई

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लीबिया के ख़िलाफ़ प्रस्ताव 1973 को लागू करने के लिए अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस की सेनाओं ने लीबिया की राजधानी त्रिपोली और प्रमुख शहर मिसराता के आसपास के इलाक़ों पर सौ से ज़्यादा क्रूज़ मिसाइलें दागी हैं.

अमरीकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन के अनुसार अमरीका और ब्रिटेन की ओर से 110 क्रूज़ मिसाइलें दागी गई हैं.

लेकिन इस अभियान और उसके मक़सदों से जुड़े कई सवाल हैं. इस अभियान की शुरुआत तो धमाकेदार हुई है लेकिन फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि इसमें कौन-कौन शामिल होगा और इसकी कमान किसके हाथ में होगी.

सबसे पहले शुरुआत फ़्रांस की वायुसेना ने की है जिसके विमानों ने लीबिया के ऊपर आकाश में उड़ानें भरी हैं और लीबियाई टैंकों और अन्य सैन्य वाहनों को निशाना बनाया है.

ब्रितानी टॉरनेडो और टाइफ़ून विमानों को भी तैयार किया गया है और संभावना है कि कनाडा के जेट भी इस अभियान में भाग लेंगे.

इस अभियान का सबसे पहला मक़सद है कि लीबियाई फ़ौज को बेनग़ाज़ी तरफ़ जाने के रोका जाए. इसका मक़सद ये भी है कि जो गद्दाफ़ी समर्थक फ़ौज के वाहन बेनग़ाज़ी पहुँच चुके हैं उन्हें वहीं पर फँसा दिया जाए और पीछे से आ रही सप्लाई चेन को नष्ट कर दिया जाए.

गठबंधन सेनाओं अगले कुछ घंटों और दिनों में काफ़ी तेज़ी से कार्रवाई करेंगी. लीबियाई की हवाई प्रतिरक्षा प्रणाली पुरानी सोवियत व्यवस्था के आधार पर बनी हुई है और पश्चिमी देश इस व्यवस्था को भली-भांति जानते हैं.

यदि लीबियाई विमान पेट्रोलिंग करने की कोशिश करते हैं तब भी उन पर हमले हो सकते हैं.

लेकिन ये अभियान उस व्यापक ढंग से शुरु नहीं हुआ जिसकी ज़रूर अमरीकी रक्षा मंत्री रोबर्ड गेट्स बताते थे.

संबंधित समाचार