'अल क़ायदा से बात करें' - एमआई-5 की पूर्व प्रमुख

एलिज़ाबेथ मैनिंघम बुलर

ब्रितानी ख़ुफ़िया एजेंसी एमआई-5 की पूर्व प्रमुख एलिज़ाबेथ मैनिंघम बुलर ने सुझाव दिया है कि ब्रितानी सरकार को 'अल क़ायदा से बातचीत' करनी चाहिए.

एमआई-5 की पूर्व महानिदेशक एलिज़ाबेथ मैनिंघम बुलर ने एक कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग के दौरान बीबीसी को बताया कि उनका मानना है कि सैन्य दृष्टिकोण से 'आतंकवाद पर जंग' जीती नहीं जा सकती है.

उनका कहना था, "यदि संभव हो तो जो लोग आप पर हमले कर रहे हों, उनसे पहले बातचीत करना बेहतर होता है, उन पर हमला करने से पहले."

उधर अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के एक पूर्व निदेशक का कहना कि चालक रहित विमानों के ज़रिए अल क़ायदा को निशाना बनाने से संघर्ष में नया मोड़ आ रहा है.

जनरल माइकल हेयडन जो वर्ष 2009 तक सीआईए के निदेशक थे, मानते हैं कि ड्रोन हमलों से उन्होंने अल क़ायदा के शीर्ष नेतृत्व को ज़्यादा से ज़्यादा समय अपनी जान बचाने के बारे में सोचना पर मजबूर किया है.

वे मानते हैं कि इससे अल क़ायदा के नेता अन्य लोगों की जान को ख़तरे में डालने के बारे में कम सोच पा रहे हैं और इसे जंग जीती जा सकती है.

'अपने मूल्यों पर कायम रहें'

एलिज़ाबेथ मैनिंघम बुलर का कहना है कि कम हमलों से सुरक्षित भविष्य संभव है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "यदि हम ऐसी स्थिति में पहुँच जाएँ जब कम हमले हों, कम ख़तरनाक हमले हों, कम युवाओं को इन सभी घटनाओं में घसीटा जाए, फ़लस्तीनी समस्या का हल हो जाए तो ख़तरा काफ़ी कम हो जाएगा."

उन्होंने उम्मीद जताई कि लोग उन लोगों से बात करने की कोशिश कर रहे होंगे जो अल क़ायदा में हाशिए पर हैं.

'आतंकवाद पर जंग' की नीति के आलोचकों का कहना है कि संदिग्ध लोगों को प्रताड़ित करने से और ग्वांतानामो बे में क़ैदियों को रखने से अल क़ाय़दा को अपने प्रचार में मदद मिल रही है.

उन्होंने आतंकवाद का सामना करने में दिल और दिमाग पर ध्यान देने की सलाह दी है.

एलिज़ाबेथ मैनिंघम बुलर का कहना था, "हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि हम अपने मूल्यों पर कायम रहे, अपने नैतिक मापदंडों, क़ानूनों पर बने रहें और वो रास्ता न अपनाएँ जिस पर मेरे विचार में अन्य लोगों ने चलने की ग़लती की है. इस तरह से हमारे पाल वो नैतिक अधिकार होगा कि हम इस मुद्दे से जुड़ी अहम समस्याओं को हल कर पाएँगे."

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