इतिहास के पन्नों से....शार्पविल गोलीबारी और चालक रहित ट्रेन

शार्पविल, दक्षिण अफ़्रीका जहाँ 50 से अधिक काले अफ़्रीकी मारे गए इमेज कॉपीरइट BBC World Service

यदि इतिहास के पन्नों में झांके तो 21 मार्च का दिन दो प्रमुख घटनाओं की याद दिलाता है.

वर्ष 1960 में दक्षिण अफ़्रीका में शार्पविल गोलीबारी की घटना हुई जब पुलिस 300 अधिकारियों ने बिना कारण लगभग 5000 से 7000 काले अफ़्रीकियों की भीड़ पर गोलियाँ चला दीं. वर्ष 1963 में लंदन में घोषणा हुई कि पहला ऑटोमैटिक यानी चालक रहित इंजन तीन हफ़्तों में लंदन भूमिगत रेल सेवा में चलने लगेगा.

शार्पविल गोलीबारी

दक्षिण अफ़्रीका के शार्पविल नगर में 21 मार्च 1960 को पुलिस ने अफ़्रीकी मूल के 5000 से 7000 लोगों की भीड़ पर गोलियाँ चलाई थीं. वहाँ रंगभेद की नीति चला रही तत्कालीन सरकार ने श्वेत इलाक़ों में जाने के लिए एक सरकारी पास या पहचान पत्र अनिवार्य बना दिया था. ये भीड़ इसी नियम के विरोध में जमा हुई थी.

फ़ायरिंग में 50 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बर आई और बाद में स्पष्ट हुए कि कुल 69 लोग मारे गए थे और 180 घायल हुए थे. इसके बाद रंगभेद के ख़िलाफ़ जंग लड़ रही अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस पर प्रतिबंध लगा दिया गया. आपको याद होगा कि महात्मा गांधी ने अपने असहयोग आंदोलन के शुरुआती प्रयोग दक्षिण अफ़्रीका में ही किए थे और वे अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस से भी जुड़े हुए थे.

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Image caption लंदन की भूमिगत रेल सेवा विश्व में सबसे पुरानी है और 1883 में शुरु हुई थी

बहरहाल, इस घटना के बाद 77 काले अफ़्रीकियों को गिरफ़्तार कर लिया गया , जिनमें से कई घायल स्थिति में अस्पतालों में भर्ती थे. ग़ौरतलब है कि इस घटना से संबंधित 300 अधिकारियों में से किसी एक को भी कभी सज़ा नहीं हुई.

चालक रहित इंजन

आज तो ऑटोमेटिक ट्रेन, ऑटोमेटिक इंजन और ऑटोमेटिक सिग्नल से ट्रेन का चलना आम बात है.

लेकिन जब 21 मार्च वर्ष 1963 में पहली बार ये घोषणा हुई कि तीन हफ़्तों बाद लंदन अंडरग्राउंड यानी लंदन के भूमिगत रेल नेटवर्क पर चालक रहित इंजन का इस्तेमाल होगा, तो इस ख़बर ने लोगों को चौंका दिया. विश्व की सबसे पुरानी भूमिगत रेल सेवा लंदन अंडरग्राउंड 1983 में शुरु हुई थी.

ये घोषणा भी 21 मार्च 1963 के दिन ही हुई कि ऑटोमेटिक इंजन के परीक्षणों पर लगभग 60 हज़ार पाउंड का ख़र्च आया है और ऑटोमेटिक इंजन का ट्रायल पश्चिमी लंदन के साऊथ ईलिंग रेल स्टेशन पर देखा जा सकता है. महत्वपूर्ण है कि इन परीक्षणों के बाद वर्ष 1968 और 1971 के बीच विकटोरिया लाइन दुनिया की पहली ऑटोमेटिक रेल लाईन बनी.