'मकसद से भटक रही हैं पश्चिमी सेनाएं'

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लीबिया में सेना के एक प्रवक्ता ने घोषणा की है कि सरकार ने तुरंत प्रभाव से अपने सैन्य दलों को युद्धविराम लागू करने के आदेश दिए हैं.

साथ ही लीबिया के सरकारी टेलिविज़न पर बयान जारी करते हुए सरकार के एक प्रवक्ता अहमद अल शरीफ़ ने लीबिया के नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि वो राजधानी त्रिपोली से बेनग़ाज़ी तक निकाले जाने वाले शांति मार्च में हिस्सा लें.

इस बीच अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा ने कहा है पश्चिमि देशों की ओर से लीबिया पर किए जा रहे हमले 'नो फ़्लाई ज़ोन' लागू करने के मकसद से आगे बढ़ चुके हैं.

अम्र मूसा ने कहा कि अरब लीग लीबिया के नागरिकों की सुरक्षा चाहता है न कि उन पर ज़्यादा से ज़्यादा हवाई हमले.

ग़ौरतलब है कि 22 सदस्यीय अरब लीग की ओर से 'नो फ़्लाई ज़ोन' को मिली हरी झंडी को इस कार्रवाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया था.

अम्र मूसा के इस ताज़ा बयान के बाद स्पष्ट है कि इस फ़ैसले को लेकर संगठन के भीतर ही आवाज़ उठने लगी है.

लीबिया पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अरब लीग की रज़ामंदी के बिना 'नो फ़्लाई ज़ोन' लागू करने की कार्रवाई अपना औचित्य खो देगी.

त्रिपोली में तेज़ धमाके

इस बीच लीबिया से आ रही ताज़ा खबरों के मुताबिक राजधानी त्रिपोली में तेज़ धमाके सुने गए हैं.

'नो फ़्लाई ज़ोन' लागू करने के मकसद से की जा रही दूसरे दिन की कार्रवाई के दौरान कर्नल गद्दाफ़ी के घर के आसपास 'बाब अल अज़ीज़िया' से गहरा धुआँ उठाता देखा गया.

हालांकि अमरीकी सेना के प्रवक्ता का कहना है गठबंधन सेनाएं कर्नल गद्दाफ़ी या उनके घर को निशाना नहीं बना रही हैं.

इससे पहले अमरीका और ब्रिटेन की सेनाओं ने लीबिया की राजधानी त्रिपोली और प्रमुख शहर मिसराता के आसपास सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए 100 से ज़्यादा क्रूज़ मिसाइलें दागी थीं.

अमरीका और फ़्रांस का कहना है कि अरब देश क़तर ने भी इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में शामिल होने का फ़ैसला किया है. फ्रांसिसी अधिकारियों का कहना है कि क़तर इस अभियान के लिए अपने चार विमान भेजने की तैयारी कर रहा है.

15 विमानों के साथ लीबिया पर दूसरे दिन की सैन्य कार्रवाई में जुटे फ्रांस का कहना है 'नो फ़्लाई ज़ोन' लागू करने को लेकर उसे कहीं भी विरोध का सामना नहीं करना पड़ा.

लीबिया से ताज़ा तस्वीरें

लोगों को हथियारों से लैस करेंगे: गद्दाफ़ी

अमरीका के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी माइक मलेन ने भी कहा है कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से पारित नो फ़्लाई ज़ोन अब पूरी तरह लागू हो गया है और बेनग़ाज़ी में विद्रोहियों पर हमला कर रहे गद्दाफ़ी समर्थक सैनिकों को खदेड़ दिया गया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार गद्दाफ़ी समर्थक फ़ौज द्वारा इस्तेमाल की जा रहे राजमार्ग पर कम से कम 14 शव और दर्जनों जले हुए वाहन देखे गए हैं. संवाददाताओं ने जलते हुए टैंको और नष्ट हुए वाहनों के विवरण भेजे हैं.

क्या है नो फ़्लाई ज़ोन?

लीबिया में जैसे ही सैन्य कार्रवाई शुरु हुई लीबिया में 41 साल से सत्ता में बने हुए कर्नल गद्दाफ़ी ने कहा कि भू-मध्यसागर और उत्तर अफ्रीका युद्ध क्षेत्र में बदल गए हैं.

उन्होंने चेतावनी दी, "भू-मध्यसागर के क्षेत्र में नागरिक और सैन्य ठिकाने के इन हमलों का निशाना बनने का ख़तरा है. सैना के डिपो लोगों के लिए खोल दिए गए हैं और लीबिया की एकता और गौरव की रक्षा के लिए उन्हें हर तरह के हथियारों से लौस किया जा रहा है."

राष्ट्रीय टेलीविज़न पर प्रसारित गद्दाफ़ी के संदेश में कहा गया है कि लीबियाई लोगों को हथियारों से लौस किया जाएगा ताकि 'उपनिवेशी ताकतों' का सामना किया जा सके.

सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर किसने क्या कहा?

लीबियाई अधिकारियों ने कहा है कि नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है लेकिन उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी है.

भारत नाखुश

इस बीच भारत ने लीबिया में अमरीकी और यूरोपीय देशों की सेनाओं की ओर से जारी हवाई हमलों की निंदा की है और कहा है इससे लीबिया के आम नागरिकों के लिए और मुश्किलें पैदा होंगी.

इस कार्रवाई पर खेद ज़ाहिर करते हुए रविवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा,''लीबिया में जारी संघर्ष की स्थिति को लेकर भारत चिंतित है. जैसा कि हमने पहले कहा था इस तरह के प्रयास स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश करें न कि आम नागरिकों के लिए मुश्किलें और बढ़ाएं.''

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत उम्मीद करता है कि इससे लीबिया के बेगुनाह नागरिकों, वहां रह रहे विदेशी नागरिकों और कूटनीतिज्ञों के लिए मुश्किलें पैदा नहीं होंगी.

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