आख़िरकार जीत हमारी होगी: गद्दाफ़ी

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लीबिया में पश्चिमी देशों की सैन्य कार्रवाई शुरु होने के बाद पहली बार सरकारी टेलिविज़न पर नज़र आए कर्नल गद्दाफ़ी ने कहा है कि लीबिया में आखिरकार जीत उनकी ही होगी.

राजधानी त्रिपोली में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए गद्दाफ़ी ने कहा कि विद्रोहियों और अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस के सैन्य गठबंधन से हो रही इस लड़ाई में 'अंतत: जीत हमारी ही होगी'.

इस बीच अमरीका कि विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि, ‘गद्दाफ़ी के क़रीबी विश्वभर में उनके निर्वासन की संभावनाएं तलाश रहे हैं.’ हालांकि उन्होंने इस बारे में सटीक और विस्तृत जानकारी नहीं दी.

लीबिया: तलवार की धार पर अमरीका

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि उन्हें विश्वास है कि अमरीका जल्द ही लीबिया में सैन्य अभियान का नियंत्रण गठबंधन सेनाओं को सौंप देगा. लेकिन उन्होंने भी इस पर कोई निर्णायक जानकारी नहीं दी.

ओबामा पहले ही कह चुके हैं कि हवाई हमलों का उद्देश्य आम लोगों को बचाना है लेकिन अमरीका चाहता है कि गद्दाफ़ी सत्ता से हटें.

असहमति और असमंजस की स्थिति

लीबिया में अमरीका की भूमिका और ख़ासतौर पर नेटो के शामिल होने को लेकर असहमति और असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पश्चिमी सेनाओं में इस बात को लेकर सहमति बन गई है कि कौन इस अभियान का समन्वय करेगा हालांकि अभी भी नेटो की भूमिका स्पष्ट नहीं हो पाई है.

इससे पहले नेटो सैन्य गठबंधन ने कहा था कि उसने लीबियाई सरकार को हथियार बेचे जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस प्रतिबंध पर अमल के लिए केंद्रीय भू-मध्य सागर में नेटो के लड़ाकू विमान और जहाज़ तैनात किए जा रहे है.

गद्दाफ़ी निशाने पर नहीं हैं: पश्चिमी सेना

मंगलवार को भी गद्दाफ़ी समर्थक सैनिकों ने ज़मीनी हमले किए और पश्चिमी शहर मिसराता में अंधाधुंध गोलाबारी की.

इस बीच लीबिया में अमरीका का एक लड़ाकू विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ है. अमरीकी सैन्य प्रवक्ता के अनुसार चालक दल के दोनों सदस्यों को बचा लिया गया है लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह विमान लीबिया से सैनिकों की कार्रवाई में गिरा या खुद ब खुद गिरा.

अमरीकी सैन्य कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे एडमिरल सैमुयल लॉकलीयर ने कहा है कि ‘नो फ़्लाई ज़ोन’ लागू करने की कार्रवाई ने लीबिया की वायुसेना को कमज़ोर कर दिया है.

दक्षिणी लीबिया में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विद्रोही पश्चिमी देशों के हवाई हमलों का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं क्योंकि वो बहुत ही असंगठित जान पड़ते हैं.

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