सीरिया:मस्जिद के बाहर फ़ायरिंग

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Image caption सीरिया में 50 साल से जारी आपातकाल क़ानूनों का विरोध हो रहा है

सीरिया में लगातार चौथे दिन जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान डेरा शहर में सुरक्षाबलों ने एक मस्जिद के बाहर आँसू गैस छोड़ी है और गोलियाँ चलाई हैं जिसके कारण कम से कम छह लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने हताहतों की जानकारी देते हुए कहा है कि डेरा की ओमारी मस्जिद सरकार विरोधी प्रदर्शनों का केंद्र बन गई है और सैकड़ों प्रदर्शनकारी मस्जिद के बाहर सड़कों पर जमा हो गए थे.

मध्यपूर्व में विद्रोह की आंधी क्यों?

दूसरी ओर सरकार ने हिंसा के लिए एक सशस्त्र गुट को दोषी ठहराया है. सरकारी मीडिया का कहना है कि चार लोग मारे गए हैं.

ट्यूनिशिया और मिस्र में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद से मध्य पूर्व के कई देशों में सरकारी विरोधी प्रदर्शन भड़के हैं और सीरिया की वर्तमान घटनाएँ भी इसी घटनाक्रम का हिस्सा हैं.

प्रदर्शनकारी सत्ताधारी बाथ पार्टी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं और चाहते हैं कि और राजनीतिक स्वतंत्रता और अधिकार दिए जाएँ और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो.

संयु्क्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त नवी पिल्लेई ने कहा है, "सीरिया की सरकार ज़रूरत के ज़्यादा बल के प्रयोग से बाज़ आए और क्योंकि सरकार के सामने अपनी समस्याओं पर विचार और माँगे रखना लोगों का वैध अधिकार है."

यूरोपीय संघ ने इस बल प्रयोग को अस्वीकार्य बताया है.

कोई जवाबदेही नहीं है: कार्यकर्ता

डेरा के पुराने शहर में ओमारी मस्जिद के सामने मंगलवार दोपहल से ही सैकड़ों लोग एकत्र होने शुरु हो गए थे.

लेकिन पुलिस ने इन्हें तितर-बितर कर दिया.

प्रदर्शनकारी दोबारा जमा होने लगे और मध्यरात्रि के आसपास बिजली और फ़ोन की लाइनें काट दी गईं.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आँसू गैस छोड़ी गई और फ़ायरिंग भी हुई.

एक डॉक्टर अली घसाब अल-महामिद जो प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए घटनास्थल पर पहुँचे थे, उन पर भी फ़ायरिंग हुई और वे मारे गए.

सरकार विरोधी एक कार्यकर्ता ने बीबीसी को बताया, "सीरिया की सरकार अब मानवता के ख़िलाफ़ अपराध कर रही है और निर्दोष, निहत्थे और शांतिपूर्ण लोग इसका शिकार बन रहे हैं. सरकार को लगता है कि वह बिना किसी जवाबदेही के लोगों को मार सकते हैं."

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