यमन और सीरिया में रैलियां

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Image caption यमन में सरकार के समर्थक और विरोधी दोनों ही लोग रैलियां कर रहे हैं.

यमन की राजधानी सना में परस्पर विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं जबकि सीरिया के डेरा शहर में हो रही रैलियों के दौरान हथियारबंद लोगों ने गोलीबारी की है जिसमें 20 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

सीरिया के के डेरा में नाराज़ लोग पूर्व राष्ट्रपति हफ़ीज़ अल असद का पुतला जलाने की कोशिश कर रहे थे और उसी समय किसी ने गोलियां चलाईं.

एक हफ्ते पहले सीरिया मे सरकारी बलों ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया था जिसके बाद डेरा में अब प्रदर्शन हुए थे.

शुक्रवार को प्रदर्शनों से पहले पत्रकारों, प्रदर्शनकारियों पर शहर में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

राजधानी दमिश्क में भी प्रदर्शन हुए हैं लेकिन सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनों को ज़ोर पकड़ने नहीं दिया.

गुरुवार को सीरिया की सरकार ने कहा था कि वो राजनीतिक सुधारों पर विचार कर रही है जिसके तरह 1960 में लाए गए आपातकाल क़ानून को बदलने पर भी विचार किया जाएगा.

यमन में प्रदर्शन

उधर यमन में भी हज़ारों की संख्या में लोग परस्पर विरोधी रैलियों में हिस्सा ले रहे हैं.

एक हफ़्ते पहले ही सना में हुए प्रदर्शनों में की गई गोलीबारी में 50 लोग मारे गए थे.

सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 1978 में राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के सत्ता में आने के बाद उनके ख़िलाफ़ ये अब तक की सबसे बड़ी रैली है.

उधर राष्ट्रपति सालेह ने अपने समर्थकों की एक रैली से कहा कि वो ‘सत्ता हस्तांतरण’ के लिए तैयार हैं लेकिन वो सत्ता ‘सुरक्षित हाथों’ में ही सौपेंगे.

सालेह ने किसी भी प्रकार के ख़ून ख़राबे की भर्त्सना की और अपने समर्थकों से मज़बूती से खड़े रहने को कहा.

इससे पहले राष्ट्रपति सालेह ने इन आरोपों का खंडन किया था कि पिछले हफ्ते प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी में सरकारी सेनाओं का हाथ था.

सरकारी और विपक्षी गुटों ने सना की सड़कों के कई स्थानों पर चेक प्वाइंट लगा दिए हैं जिसकी पहरेदारी हथियारबंद लोगों के हाथों में है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि शहर में संघर्ष की संभावनाएं बढ़ गई हैं.

समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार शुक्रवार के दिन हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी पहुंचे हैं.

अपने बेहतरीन सूट और काले चश्मों में राष्ट्रपति सालेह ने माइक्रोफोन लेकर अपने समर्थकों को संबोधित किया.

सालेह का कहना था, ‘‘हमें सत्ता नहीं चाहिए लेकिन आवश्यकता है कि सत्ता सुरक्षित हाथों में सौंपी जाए न कि भ्रष्ट, गंदे और बीमार हाथों में.’’

उनका कहना था, ‘‘ हम एक भी गोली चलाए जाने के ख़िलाफ़ हैं और जब हम रियायत देते हैं तो ये सुनिश्चित करने के लिए कि ख़ूनखराबा न हो.हम मज़बूती से खड़े रहेंगे. पूरी ताकत से खड़े रहेंगे.’’

समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार सालेह के कुछ समर्थक हाथों में बंदूक और कुल्हाड़ियां लिए हुए थे.

प्रदर्शनों के दौरान कई बैनर भी दिख रहे थे.

शहर के दूसरे हिस्से में हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सालेह के विरोध में भी जमा हुए थे.

एक 33 वर्षीय छात्र अब्दुल्ला जबाली का कहना था, ‘‘ये कसाई है. इन्होंने हमारे साथियों को मारा है. मैं इससे छुटकारा पाना चाहता हूं.’’

एक अन्य प्रदर्शनकारी महदी मोहम्मद का कहना था कि वो राष्ट्रपति से छुटकारा पाना चाहते हैं और अगर वो शांति से सत्ता छोड़ दें तो बहुत अच्छा होगा.

बुधवार को यमन के संसद में आपातकाल संबंधी नियम पारित किए गए जिसके तहत सुरक्षा बलों को कई अधिकार मिल गए हैं.

यमन में पिछले कुछ महीनों में कई वरिष्ठ सैन्य जनरल भी सरकार का साथ छोड़ कर प्रदर्शनकारियों से जा मिले हैं.

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