लंदन में कटौती के ख़िलाफ़ विशाल प्रदर्शन

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ब्रिटिश सरकार की सार्वजनिक ख़र्च में कटौती की योजना के ख़िलाफ़ लंदन में शनिवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए.

नौकरियों में बड़े पैमाने पर हो रही छंटनी और बंद होते कारोबारों और विभागों से नाराज़ सरकारी और ग़ैर सरकारी कर्मचारी अपना विरोध जताने के लिए सड़कों पर उतर आए.

इस विरोध रैली के लिए लगभग साढ़े चार हज़ार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे.

लंदन के ट्राफाल्गर स्क्वेयर से ट्रेड यूनियनों के झंडे और विशाल बैनर लिए हुए प्रदर्शनकारियों का एक सागर सा उमड़ा, जो हाइड पार्क में जा कर थमा.

गाजे बाजे, सीटियों और बैंड की धुनों के साथ हाइड पार्क की ओर बढ़ता ये मार्च आम तौर पर शांतिपूर्ण रहा.

पिकैडिली सर्कस और ऑक्सफ़र्ड सर्कस के इलाके में कुछ प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हल्की झड़पें हुईं, लेकिन उस गड़बड़ी पर तुरंत क़ाबू कर लिया गया.

कुछ ट्रेड यूनियनों के मुताबिक लगभग ढाई लाख लोग इस रैली में हिस्सा लेने आए.

प्रदर्शनकारियों का रुख़

हालांकि इस विरोध मार्च में ज़्यादातर लोग सरकारी क्षेत्र से थे, लेकिन शिक्षक, व्यापारी, डॉक्टर, नर्स, अभिभावक और छात्र सभी अपना असंतोष जताने के लिए निकले.

प्रदर्शनकारियों का यही कहना था कि वे सरकार चेताने के लिए रैली में आए हैं.

एक प्रदर्शनकारी का कहना था, "ब्रिटेनवासियों को जागना होगा और देखना होगा कि ये कटौती उनके जीवन पर कितना बुरा असर डाल रही है."

एक महिला प्रदर्शनकारी का कहना था, "सरकार इस विरोध को गंभीरता से ले और ये देखे कि इस कटौती से कितनी भारी संख्या में लोगों की रोज़ी रोटी छिनेगी और कितने लोग बेरोज़गार हो जाएंगे."

एक अन्य महिला का कहना था, "इतनी बड़ी संख्या में लोग बेरोज़गार होंगे तो देश का भला कैसे हो सकता है."

गहराते मतभेद

ब्रिटेन की सरकार का ये कहना है कि ब्रिटेन के बजट का वार्षिक घाटा लगभग 156 अरब डॉलर का है और इसे कम करने के लिए सार्वजनिक ख़र्च में कटौती ज़रूरी है.

लेकिन विपक्षी लेबर पार्टी का कहना है कि इतने भारी पैमाने पर की जा रही कटौती अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ देगी.

लेबर पार्टी का ये भी कहना है कि ब्रिटेन के 60 लाख सरकारी कर्मचारियों में से 40 प्रतिशत की नौकरियां जाने से जहां बेरोज़गारी बढेगी वहीं सार्वजनिक सेवाओं पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.

ब्रिटन की विपक्षी लेबर पार्टी के नेता एड बॉल्स ने कहा कि लोग सरकार से ये कहने आए हैं कि वह अपनी कटौती की योजना पर पुनर्विचार करे.

उनका कहना था, "इतनी भारी संख्या में प्रदर्शनकारी यहां वित्तमंत्री जॉर्ज ऑस्बोर्न और ब्रिटिश सरकार से ये कहने आए हैं कि वो कटौती की इस योजना पर पुनर्विचार करे, इतनी सख़्ती न करे कि 1980 के दशक की पुनरावृत्ति हो जाए, जब लोगों के वैचारिक मतभेद चरमसीमा पर पहुंच गए थे."

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