लीबिया: विद्रोही आगे बढ़े, रास लानुफ़ पर भी कब्ज़ा

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Image caption लीबिया में विद्रोहियों ने रास लानूफ़ पर क़ब्ज़ा किया जहां देश का प्रमुख तेल केंद्र है

लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी की सत्ता के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे विद्रोही काफ़ी तेज़ी से पश्चिमी दिशा की ओर बढ़ रहे हैं. ब्रेगा और अजदाबिया शहरों के बाद उन्होंने बीबीसी के साथ बातचीत में रास लानूफ़ पर क़ब्ज़ा करने का दावा किया है.

रास लानुफ़ तेल उत्पादन और शोधन का मुख्य केंद्र है. विद्रोहियों ने बीबीसी को बताया कि पूर्वी तटीय नगर ब्रेगा और उक़ैला पर बिना किसी लड़ाई के नियंत्रण हो गया.

उन्होने कहा कि अब वो गद्दाफ़ी समर्थक बलों की खोज करने के लिए रास लानूफ़ की सड़कें छान रहे हैं. विद्रोहियों के साथ सफ़र कर रहे बीबीसी के एक संवाददाता का कहना है कि जैसे-जैसे विद्रोही पश्चिम की ओर बढ़ रहे हैं कर्नल गद्दाफ़ी के सैनिक तेज़ी से पीछे हटते जा रहे हैं.

उधर फ़्रांस ने कहा है कि उसके लड़ाकू विमानों ने कम से कम पाँच लीबियाई लड़ाकू जेट गिरा दिए हैं.

विरोध की शुरुआत

ट्यूनिशिया और मिस्र में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद, लगभग डेढ़ महीने पहले लीबिया में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरु हुए थे जिन्होंने बाद में कर्नल गद्दाफ़ी की सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह का रूप ले लिया है.

जब कर्नल गद्दाफ़ी ने विद्रोहियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग किया तो अनेक देशों ने इसकी निंदा की थी.

फिर फ़्रांस, ब्रिटेन की पहल और अमरीका के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लीबिया पर 'नो फ़्लाई ज़ोन' कायम करने का प्रस्ताव परित किया जिसके बाद लीबियाई सैन्य ठिकानों पर अनेक मिसाइल दागे गए हैं और भीषण बमबारी हुई है.

गद्दाफ़ी के विरोधी चाहते हैं कि 1969 से सत्ता में बने हुए कर्नल गद्दाफ़ी सत्ता छोड़ दें और लीबिया में व्यापक राजनीतिक सुधार शुरु हों.

अंतरराष्ट्रीय बलों का सहयोग

कुछ ही दिन पहले तक ऐसा आभास हो रहा था कि गद्दाफ़ी की फ़ौज की कार्रवाई झेल रहे विद्रोही हार जाएँगे.

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Image caption विद्रोही तेज़ी से पश्चिम की ओर बढ़ रहे हैं

लेकिन अब विद्रोही बड़ी तेज़ी के साथ पश्चिम की ओर बढ़ रहे हैं और उन्होने ब्रेगा और अजदाबिया शहरों पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है.

लेकिन बीबीसी संवाददाताओं के अनुसार यह संभव तभी हो पाया क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बलों ने कर्नल गद्दाफ़ी की सैन्य क्षमता पर हवाई हमले करके उसे कमज़ोर कर दिया.

इससे विद्रोहियों को बल मिला और वो फिर से अजदाबिया पर क़ब्ज़ा करने में सफल रहे.

ये शहर लीबिया के दो प्रमुख राजमार्गों के बीच पड़ता है और यहीं से पश्चिम की ओर जाने वाली सड़क राजधानी त्रिपली तक पहुंचती है.

मिसराता शहर में अब भी सरकारी निशानेबाज़ और टैंक आम नागरिकों पर निशाना साध रहे हैं और विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय बलों से अपील की है कि वो हवाई हमलों से उनकी मदद करें.

सबूत गढ़ रहे हैं गद्दाफ़ी: अमरीका

फ़्रांस का कहना है कि उसके लड़ाकू विमानों ने कई सरकारी विमान और हैलिकॉप्टर नष्ट कर दिए हैं जिन्हे आम नागरिकों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही थी.

इस बीच ब्रिटेन के प्रतिरक्षा मंत्री लियम फ़ॉक्स ने बीबीसी को बताया, "अंतरराष्ट्रीय बल विद्रोहियों को हथियार सप्लाई नहीं कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र का अस्त्र प्रतिबंध समूचे लीबिया पर लागू है जिसका पालन करना ज़रूरी है."

अमरीका के प्रतिरक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने करनल गद्दाफ़ी पर आरोप लगाया है कि वो इन हवाई हमलों में आम नागरिकों के मारे जाने के सबूत गढ़ रहे हैं.

गद्दाफ़ी प्रशासन ने कहा था कि पिछले सप्ताह लीबिया पर हुए हवाई हमलों में कोई सौ लोग मारे गए हैं.

सरकार के एक प्रवक्ता मूसा इब्राहिम ने कहा," बहुत लोगों की जानें जा रही हैं जिनमें सैनिक और आम नागरिक शामिल हैं".

लेकिन रॉबर्ट गेट्स ने अमरीकी टेलिविज़न नैटवर्क सीबीएस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि आम नागरिकों के मारे जाने के प्रमाण जुटाना कठिन है.

फिर भी ऐसी ख़ुफ़िया जानकारी मिली है कि कर्नल गद्दाफ़ी की सेना सबूत जुटाने के नाम पर उन शवों को इकट्ठा कर रही है जिन्हे उन्होने ख़ुद मारा है.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने साप्ताहिक भाषण में कहा कि 'लीबिया अभियान' स्पष्ट और सटीक है इसलिए सफल हो रहा है.

उन्होने कहा, "हमने कार्रवाई करने में फुर्ती दिखाई इसलिए मानवीय संकट टल गया और सैकड़ों आम नागरिकों, निरपराध लोगों, महिलाओं और बच्चों की जान बचाई जा सकी."

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