सीरिया में कई प्रदर्शनकारियों की मौत

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Image caption सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शन

सीरिया की सरकार का कहना है कि तटीय नगर लतकिया में कल हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में 12 लोग मारे गए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि इनमें अधिकतर आम नागरिक और सुरक्षा बल के सदस्य थे लेकिन दो हथियारबंद हमलावर भी थे.

उनका कहना है कि छतों पर बैठे अज्ञात बंदूकधारियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं जिसमें कम से कम 200 लोग घायल भी हुए.

सीरिया की सेना ने प्रमुख शहरों को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

पिछले कई दिनों से राष्ट्रपति बशर अल असद की सत्ता के ख़िलाफ़ पूरे देश में चल रहे प्रदर्शनों में दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं.

प्रशासन इस हिंसा के लिए हथियारबंद गिरोहों को ज़िम्मेदार बता रहा है जो देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लतकिया और दक्षिणी शहर तफ़स में प्रदर्शनकारियों ने सत्ताधारी बाथ पार्टी के कार्यालयों को जला डाला और एक बार फिर सैकड़ों लोगों ने डेरा शहर में प्रदर्शन किए.

इससे पहले अमरीका और संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर सुरक्षा बलों द्वारा चलाई गईं गोलियों के लिए सरकार की भर्त्सना की थी.

लेकिन राष्ट्रपति असद की एक सलाहकार ने बीबीसी को बताया कि सुरक्षा बलों ने नहीं बल्कि सशस्त्र गिरोहों ने नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईँ.

उन्होने दोहा स्थित एक सुन्नी धार्मिक नेता शेख़ यूसुफ़ अल क़रादवी पर लतकिया में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया.

राजनीतिक बंदियों की रिहाई

सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन तफ़स में हुआ जो डेरा शहर से 18 किलोमीटर दूर उत्तर में है और जॉरडन की सीमा के निकट है.

डेरा शहर राष्ट्रपति असद के 11 साल पुराने शासन के ख़िलाफ़ आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार को सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए तीन प्रदर्शनकारियों को दफ़नाने के लिए आज हज़ारों लोग तफ़स की सड़कों पर उतर आए.

उन्होने सरकार विरोधी नारे लगाए और बाथ पार्टी के मुख्यालय और एक पुलिस स्टेशन को आग लगा दी.

शनिवार को डेरा में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने भूतपूर्व राष्ट्रपति हाफ़िज़ अल असद की ध्वस्त प्रतिमा पर चढ़कर सरकार विरोधी नारे लगाए.

वो ऐसे बैनर उठाए हुए थे जिनपर लिखा था, ‘आम जनता इस सरकार का पतन देखना चाहती है’.

राष्ट्रपति असद की सलाहकार ने कहा कि सीरिया में काफ़ी समय से राजनीतिक सुधारों पर विचार हो रहा है और प्रशासन जल्दी से जल्दी सांविधानिक और पार्टी संबंधी सुधारों का प्रस्ताव रखेगा जिसपर जनमत संग्रह कराया जाएगा.

इससे पहले लंदन स्थित एक मानवाधिकार संगठन ने बताया कि 200 से अधिक बंदियों को दमिश्क की जेल से रिहा कर दिया गया है जिनमें अधिकतर इस्लामिक हैं.

लेकिन एक अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ता ने रॉएटर समाचार एजेंसी को बताया कि कुल 70 बंदी छोड़े गए हैं.

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