एम्नेस्टी: मृत्युदंड के मामले घटे

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Image caption रिपोर्ट के मुताबिक़ अमरीका में 2010 में 46 लोगों को मौत की सज़ा दी गई.

मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेश्नल का कहना है कि दुनियाभर में मृत्यु दंड दिए जाने की संख्या में कमी आई है.

हालांकि साल 2009 के मुक़ाबले 2010 में ज़्यादा देशों ने इस दंड प्रक्रिया का इस्तेमाल किया. 2010 में 23 देशों ने मृत्युदंड का इस्तेमाल किया, जबकि 2009 में ये संख्या 19 थी.

लेकिन मौत की सज़ा भुगतने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है. जहां 2009 में 714 लोगों को मौत की सज़ा हुई, वहीं 2010 में ये संख्या 527 दर्ज की गई है.

इन आंकड़ों में चीन शामिल नहीं है, जहां मृत्युदंड का इस्तेमाल इन सभी देशों के मुक़ाबले ज़्यादा होता है.

मंगोलिया मौत की सज़ा पर रोक लगा चुका है. पिछले साल अफ़्रीक़ी देश गैबन इस प्रक्रिया पर रोक लगाने वाला 139वां देश बन गया.

हांलाकि यूरोप में 2009 के दौरान मृत्युदंड का कोई मामला सामने नहीं आया, लेकिन बेलारुस में दो लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक़ अमरीका में 2010 में 46 लोगों को मौत की सज़ा दी गई थी.

ड्रग अपराध और मृत्युदंड

एमनेस्टी इंटरनेश्नल के महासचिव सलिल शेट्टी ने कहा, “कुछ एक मामलों को छोड़कर, 2010 के आंकड़ों को देखकर हम कह सकते हैं कि हम मृत्युदंड के उन्मूलन की ओर बढ़ रहे हैं. ”

लेकिन साथ ही उनका कहना था, “जिन देशों में मृत्युदंड का इस्तेमाल होता रहा है, वो 2010 में हज़ारों ऐसे मामलों के ज़िम्मेदार हैं. ये देश मृत्युदंड-निरोधी वैश्विक मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं.”

एमनेस्टी इंटरनेश्नल की इस रिपोर्ट में पाया गया है कि 2010 में कई लोगों को ड्रग अपराध के लिए मौत की सज़ा दी गई.

मलेशिया में आधे से ज़्यादा मौत की सज़ा पाने वाले ऐसे थे, जिन्हें ड्रग अपराध का दोषी पाया गया था.

मृत्युदंड देने के लिए दुनियाभर में इस्तेमाल की गई प्रणालियों में सर क़लम कर देना, फांसी देना, बिजली का प्रयोग, गोली मार देना और प्राणघातक इंजेक्शन शामिल है.

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