परमाणु सुरक्षा पर जी-20 की बैठक हेनी चाहिए:सारकोज़ी

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Image caption जापान में आए भूकंप और सुनामी के बाद वहां का दौरा करने वाले वो पहले विदेशी नेता हैं.

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने कहा है कि परमाणु सुरक्षा के मामले में एक अंतरराष्ट्रीय मानक का गठन होना चाहिए.

इस महीने जापान में आए भूकंप और सुनामी के बाद जापान का दौरा करने वाले पहले विदेशी नेता सारकोज़ी ने कहा कि जापान के फ़ुकुशीमा परमाणु संयंत्र को जो नुक़सान हुआ है उसको देखते हुए इस विषय पर बातचीत के लिए जी-20 देशों की एक बैठक होनी चाहिए.

इस बीच जापान में फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के पास समुद्र में विकिरण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है जिसकी वजह से वैज्ञानिकों को लगने लगा है कि विकिरण का समुद्र के पानी में घुलना निरंतर जारी है.

अधिकारियों का कहना है कि वे अभी तक यह नहीं समझ पा रहे हैं कि विकिरण किस तरह समुद्र में जा रहा है.

इस बीच फुकुशिमा संयंत्र से 40 किलोमीटर दूर स्थित एक गाँव में विकिरण का स्तर काफ़ी ऊँचा पाया गया है जिसके बाद निषिद्ध क्षेत्र का दायरा बढ़ाने की चर्चा शुरू हो गई है.

बढ़ता विकिरण

पिछले कई दिनों से समुद्र के पानी में विकिरण का स्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि विकिरण निरंतर जारी है वह बिना किसी बाधा के समुद्र में घुल रहा है.

पूरे इलाक़े में मछली पकड़ने पर रोक लगा दी गई है, जापानी अधिकारियों को उम्मीद है कि समुद्र के पानी में लहरों की वजह से विकिरण निष्प्रभावी हो जाएगा.

उनका अनुमान है कि मौजूदा विकिरण के स्तर को देखते हुए पानी में रहने वाले जीवों को कोई विशेष ख़तरा नहीं है.

जापानी सरकार ने फुकुशिमा संयंत्र के आसपास साठ किलोमीटर के दायरे को निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया है लेकिन उनका कहना है कि इस दायरे को और बढ़ाने की फ़िलहाल ज़रूरत नहीं है.

फुकुशिमा संयंत्र से 40 किलोमीटर की दूर पर स्थित एक गाँव में विकिरण का स्तर सामान्य से दोगुना अधिक पाया गया है.

सरकार का कहना है कि निषिद्ध क्षेत्र से हज़ारों लोगों के काफ़ी पहले बाहर निकाला जा चुका है इसलिए लोगों के जीवन को विकिरण से कोई ख़तरा नहीं है.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए स्थिति पर नज़र रखे हुए है और उसने जापानी सरकार की हरसंभव सहायता करने का वादा किया है.

जापानी अधिकारी पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि फुकुशिमा संयंत्र को मरम्मत करके ठीक नहीं किया जा सकता, विकिरण रुक जाने के बाद उसे हमेशा के लिए कंक्रीट के एक ढाँचे में डालकर ज़मीन के नीचे दफ़न कर दिया जाएगा.