मज़ार-ए-शरीफ़ पर हुए हमले की आलोचना

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Image caption मज़ार-ए-शरीफ़ में हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की इमारत से निकलता धुंआं

अफ़गानिस्तान के शहर मज़ार-ए-शरीफ़ में संयुक्त राष्ट्र की एक इमारत पर हुए हमले की अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून ने कड़ी आलोचना की है.

शुक्रवार को उत्तरी अफ़गानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की एक इमारत को प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी थी.इस घटना में संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों समेत 12 लोगों की जान गई थी.

प्रदर्शनकारी अमरीका में कथित तौर पर कुरान की एक प्रति जलाए जाने का विरोध कर रहे थे.

संयुक्त राष्ट्र की महासचिव बान की-मून ने इस हमले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे कायरतापूर्ण बताया है.

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Image caption मज़ार-ए-शरीफ़ में हुए इस हमले में 12 लोग मारे गए हैं.

घटना का जायज़ा लेने के लिए अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल से संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि स्टाफ़ान डे मिसतुरा मज़ार-ए-शरीफ़ के लिए रवाना हो गए है.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हमले की 'कड़े शब्दों में' आलोचना करते हुए कहा कि मज़बूत अफ़गानिस्तान के निर्माण के लिए वहां संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी अनिवार्य है.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने अफ़गान सरकार से हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों का सामना न्याय से करवाने की गुज़ारिश की है.

हमला

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जुमे की नमाज़ के बाद सैकड़ों लोग मज़ार-ए-शरीफ़ की नीली मस्जिद के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे.

अचानक भीड़ संयुक्त राष्ट्र की इमारत के बाहर जमा हो गई.

बल्ख़ प्रांत के प्रवक्ता मुनीर अहमद फ़रहाद ने कहा कि इस भीड़ के एक छोटे समूह ने संयुक्त राष्ट्र की इमारत के गार्डों से हथियार छीनकर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. उसके बाद ये लोग इमारत के भीतर दाख़िल हो गए.

स्थानीय अधिकारी लाला एम अहमदज़ई ने बीबीसी को बताया कि हमलावरों के पास बंदूकें और चाकू थे. उन्होंने कहा कि अब हालात काबू में हैं और कई संदिग्ध लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

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