लीबिया में युद्धविराम की पेशकश रद्द

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Image caption लीबिया में छापामारों ने की युद्धविराम की पेशकश

लीबिया सरकार ने वहां के छापामार नेतृत्व के सशर्त युद्ध विराम के सुझाव को 'पागलपन' भरा क़रार दिया है.

सरकार के प्रवक्ता मूसा इब्राहिम ने कहा कि कर्नल गद्दाफ़ी की समर्थक सेना कभी भी छापामारों के नियंत्रण वाले शहरों को नहीं छोड़ेगी.

उन्होंने गठबंधन सेना के हवाई हमलों की आलोचना करते हुए कहा, 'यह मानवता के ख़िलाफ़ अपराध है'. उन्होंने आरोप लगाया कि इन हमलों में कई आम नागरिक भी मारे गए हैं.

इस बीच बरेगा के पास हवाई हमले में सात नागरिकों के मारे जाने के दावे की नेटो जाँच कर रहा है. ये दावा अजदाबिया के एक डॉक्टर ने किया था पर उसकी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

मानवता के खिलाफ़ अपराध

शुक्रवार को छापामारों की अंतरिम राष्ट्रीय परिषद के प्रमुख अब्दुल जलील इब्राहिम ने संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत अब्देलिल्लाह अल ख़ातिब से पूर्वी शहर बेनगाज़ी में शांति स्थापना के बारे में विचार विमर्श किया था.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हमें युद्ध विराम से कोई आपत्ति नहीं है पर शर्त ये है कि लीबिया के पश्चिमी शहरों में रहने वालों को अपनी बात कहने की खुली छूट दी जाए और यहां के शहरों में जो सेना तैनात है वो हटाई जाए.”

उन्होंने कहा, ''हमारी मुख्य मांग मुअम्मार गद्दाफ़ी और उनके पुत्रों को लीबिया से बाहर निकालना है. हम इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे.''

इधर प्रदर्शनकारियों पर हमले किए जाने के विरोध में इस्तीफ़ा दे चुके लीबिया के न्याय मंत्री अब्दुल जलील ने कहा कि गठबंधन सेनाओं को छापामारों को अस्त्र देने चाहिए. हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने लीबिया को शस्त्रों की बिक्री पर रोक लगा रखी है.

उन्होंने कहा, ''अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय लीबिया के नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों के तहत बचाना चाहता है तो उसे छापामारों को शस्त्र देने जैसे क़दमों को उठाना चाहिए.''

मूसा इब्राहिम ने सशस्त्र युद्ध विराम के सुझाव को रद्द कर दिया. उन्होंने कहा, ''ये लोग क़बायली और हिंसक हैं जिनका, कोई एक नेता नहीं है और इनके संबंध अल क़ायदा से है.''

उन्होंने कहा, ''ये छापामार कभी शांति की बात नहीं करते. उन्होंने शांति का प्रस्ताव भी नहीं रखा. वो ऐसी मांगे रख रहे हैं जिन्हें पूरा नहीं किया जा सकता. अगर ये पागलपन नहीं है तो फिर क्या है. हम अपने शहर कभी नहीं छोड़ेंगे. हम सरकार हैं, वो नहीं.''

इब्राहिम ने कहा कि बरेगा शहर से 15 किलोमीटर दूर ज़विया एल अरग़ोब में किए गए 'अनैतिक हवाई हमलों' में छह नागरिक मारे गए.

डॉक्टर का दावा

अजदाबिया के एक डॉक्टर सुलैमान रिफ़ार्दी ने बीबीसी को बताया कि गठबंधन के हवाई हमलों ने सरकार के एक काफ़िले को निशाना बनाया जिसमें टैंक और बारूद ले जा रही लॉरी शामिल थे.

इस हमले में कुछ नागरिक भी मारे गए. मारे गए लोगों में चार महिलाए थीं, इनमें 12 से 16 साल की तीन लड़कियां शामिल हैं. ये एक ही परिवार की थीं. साथ ही तीन लड़के जिनकी उम्र 14 से 20 साल थी वो भी मारे गए हैं.

डॉ रिफा़र्दी ने कहा कि उन्होंने मृत लड़कियों के परिवारजनों से बात की.

उन्होने बताया, ''मरने वालों के परिजन दुखी नहीं है. अगर ये टैंक अजदाबिया में घुस आते हैं तो यहां क़त्लेआम हो जाता. लीबिया के लोग इससे ज़्यादा तक़लीफ़ें उठाने को तैयार है क्योंकि उन्हें पता है की गद्दाफ़ी सरकार नागरिकों को मानव कवच की तरह इस्तेमाल कर रही है.''

नेटो इस मामले की जाँच कर रही है. वहीं बीबीसी के संवाददाता वायर डेविस का कहना है कि अजदाबिया में छापामार सैनिक बरेगा की ओर बढ़ रहे हैं.

वहीं छापामारों के नियंत्रण वाले मिसराता शहर में गद्दाफ़ी समर्थक सैनिक, छापामारों और नागरिकों पर गोलाबारी कर रहे हैं. एक डॉक्टर का दावा है कि यहाँ कम से कम 140 लोग 18 मार्च से मारे गए हैं.

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